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पाठ 8 'गणितज्ञ ज्योतिषी आर्यभट्ट' हिन्दी कक्षा 8 अभ्यास (प्रश्नोत्तर और व्याकरण) | Ganitagya Jyotishi Aryabhatt

शब्दार्थ–
सम्राटों = बड़े राजाओं
कीर्ति = यश
प्रतिदिन = प्रतिष्ठा प्राप्त
एकत्र = इकट्ठे
प्रख्यात = प्रसिद्ध
मशहूर = प्रसिद्ध
आँख मूँदकर = बिना विचार किए हुए ही
बेहिचक = बिना किसी झिझक या भय के
प्रस्तुत कर देते थे = सामने रख देते थे
घटनाओं = गतिविधियों
स्वतंत्र = बिना दबाव के
जमाने के = युग के, समय के
स्थिर है = ठहरी हुई
सवाल = प्रश्न
धर्मग्रंथों = धार्मिक पुस्तकों
खिलाफ = विरुद्ध
साहस = हिम्मत
गति = चाल
खुलकर = स्पष्ट रूप से
जाहिर किए = प्रकट किए
साफ शब्दों में = स्पष्ट रूप से
स्थिर = ठहरी हुई
धुरी = कीली
चक्कर लगाती है = घूमती है

कक्षा 8 हिन्दी के इन 👇 पद्य पाठों को भी पढ़े।
1. पाठ 1 वर दे ! कविता का भावार्थ
2. पाठ 1 वर दे ! अभ्यास (प्रश्नोत्तर एवं व्याकरण)
3. उपमा अलंकार एवं उसके अंग
4. पाठ 6 'भक्ति के पद पदों का भावार्थ एवं अभ्यास

बोध प्रश्न

प्रश्न 1 निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए–
उत्तर– कीर्ति = यश
संगम = मिलना, सामागत, दो या अधिक नदियों के मिलने का स्थान
प्रलय = सर्वनाश, बर्बादी
शंकु = शंकु के आकार में
वेद्यशाला = तारों और नक्षत्रों के अध्ययन के लिए बनी शोधशाला
धारणा = मत
प्रख्यात = प्रसिद्ध
हेय = घृणित, घृणा करने योग्य
पध्दति = ढंग
सूत्रबध्द = धागे में बँधा हुआ, अथवा संक्षेप में
आसन्न = समीप, पास।

प्रश्न 2 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए–
(क) पटना शहर का पुराना नाम क्या है ?
उत्तर– पटना शहर का पुराना नाम पाटलिपुत्र है।
(ख) पटना के पास कौन-सा प्रख्यात विश्वविद्यालय था ?
उत्तर– पटना के पास नालन्दा विश्वविद्यालय था जो अपने समय का बहुत ही प्रसिद्ध विश्वविद्यालय था।
(ग) पटना के पास किन-किन नदियों का संगम हुआ है ?
उत्तर–पटना के पास गंगा, सोन और गंडक नदियों का संगम हुआ है।
(घ)वेधशाला किसे कहते हैं ?
उत्तर– वेधशाला में तारामण्डल और नक्षत्रों की गति का अध्ययन किया जाता है। यह एक प्रयोगशाला ही होती है जिसमें ज्योतिषी ग्रहण आदि के लगने और समाप्त होने के समय भविष्यवाणी करते हैं।
(ड) 'भट' शब्द का आशय क्या है ?
उत्तर–'भट' शब्द का आशय 'योद्धा' होता है।
(च) 'आर्यभटीय' पुस्तक के कौन-कौन से चार भाग है ?
उत्तर– आर्यभटीय पुस्तक के निम्नलिखित चार भाग हैं–
(1) दशगीतिका
(2) गणित
(3) कालकिृया
(4) गोल ।
आर्यभटीय पुस्तक संस्कृत भाषा में रचित है और इसकी रचना पद्मात्मक है।
(छ) 'आर्यभटिय' की ताड़पत्र पोथियों की खोज किस विद्वान ने की थी ?
उत्तर– आर्यभटीय ताड़पत्र पोथियों की खोज महाराष्ट्र के विद्वान डॉ. भाऊ दाजी ने सन् 1864 ई. में की थी। यह मलयालम लिपि में लिखी हुई थी। उन्होंने ही इनका विवरण प्रकाशित किया था।

कक्षा 8 हिन्दी के इन 👇 पाठों के बारे में भी जानें।
1. पाठ 2 'आत्मविश्वास' अभ्यास (प्रश्नोत्तर एवं व्याकरण)
2. मध्य प्रदेश की संगीत विरासत पाठ के प्रश्नोत्तर एवं भाषा अध्ययन
3. पाठ 8 अपराजिता हिन्दी (भाषा भारती) प्रश्नोत्तर एवं भाषाअध्ययन
4. पाठ–5 'श्री मुफ़्तानन्द जी से मिलिए' अभ्यास (प्रश्नोत्तर एवं भाषा अध्ययन)
5. पाठ 7 'भेड़ाघाट' हिन्दी कक्षा 8 अभ्यास (प्रश्नोत्तर एवं व्याकरण)

प्रश्न 3 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए–
(क) पाटलिपुत्र नगर से दूर आश्रम में ज्योतिषी और विद्यार्थी क्यों एकत्रित होते थे ?
उत्तर– पाटलिपुत्र नगर से दूर आश्रम में ज्योतिषी और विद्यार्थी एकत्रित होते थे। यह आश्रम टीले पर था। वहाँ बड़ी चहल-पहल थी। यह आश्रम भी कुछ भिन्न प्रकार का था। टीले पर बसे इस आश्रम का लंबा-चौड़ा आँगन था। उस आँगन में ताँबे, पीपल और लकड़ी से निर्मित अनेक तरह के यंत्र रखे हुए थे। उनमें से कुछ यंत्र गोल अकार के थे, कुछ कठोर जैसे तथा कुछ वर्तुलाकार थे तथा कुछ शंकु की तरह के थे। वास्तव में, यह एक वेधशाला थी। इन यंत्रों के आस-पास कितने ही ज्योतिषी बैठे हुए थे। वे सभी बहुत प्रसिद्ध थे। साथ ही वहाँ अनेक विद्यार्थी भी बैठे हुए थे। वे वहाँ इकट्ठे होकर हिसाब लगाकर भविष्यवाणी किया करते थे। कि ग्रहण किस समय लगेगा, कहाँ दिखाई देगा तथा इस ग्रहण का समय क्या होगा। वे अपनी गणना के अनुसार की गई भविष्यवाणीयों की सत्यता की परख करने के लिए वहाँ एकत्र हुआ करते थे।

(ख) 'पृथ्वी अपनी धुरी पर चक्कर लगाती है', इस कथन को आर्यभट्ट में किस तरह लोगों को समझाया ?
उत्तर– आर्यभट्ट ने कभी भी आँखें मूँदकर पुरानी गलत धारणाओं को स्वीकार नहीं किया। वे अपने विचारों को बिना झिझक और भय के प्रस्तुत कर दिया करते थे। उन्होंने ग्राहकों और आकाश की अन्य अनेक घटनाओं के संबंध में स्वतंत्र रूप से अपने विचार रखें। उन्होंने लोगों को खुलकर बताया कि हमारी पृथ्वी अपनी धुरी पर चक्कर लगाती है। वह स्थिर नहीं है। आकाश का तारामण्डल स्थिर है। आर्यभट्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती और इसके साथ हम भी घूमते रहते हैं। इसलिए आकाश का तारामण्डल हमें पूर्व से पश्चिम की ओर जाता हुआ जान पड़ता है।

(ग) आर्यभट्ट ने सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के विषय में क्या विचार व्यक्त किए थे ?
उत्तर– कुछ आचार्य और विद्यार्थी पाटलिपुत्र के आश्रम की वेधशाला में बैठकर आपस में चर्चा कर रहे थे कि ग्रहण क्यों लगता है। उसमें से कुछ कह रहे थे कि धर्मग्रंथों में लिखा हुआ है कि ग्रहण के समय राहु नाम का राक्षस सूर्य और चंद्रमा को निगल लेता है। हमें चाहिए कि इन ग्रंथों की बातों पर हमें विश्वास करना चाहिए। परंतु वहाँ उपस्थित विद्यार्थी मंडल में एक तरुण विद्यार्थी बैठा हुआ था। वह अपने साथी विद्यार्थियों को समझ आ रहा था कि पृथ्वी की बड़ी छाया जब चंद्रमा पर पड़ती है तो चंद्रग्रहण लगता है और इसी तरह जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आता है तथा वह सूर्य को ढक लेता है, तब सूर्यग्रहण होता है। राहु नामक राक्षस सूर्य अथवा चंद्रमा को निगल जाता है, यह सब कपोल कल्पित धारणा है। हमें इनमें विश्वास नहीं करना चाहिए।

(घ) ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में संसार को प्राचीन भारत की क्या देन है ?
उत्तर– ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में संसार को प्राचीन भारत की सबसे बड़ी देन है– शून्य सहित केवल दश अंक संकेतों से भी संख्याओं को व्यक्त करना। इस दाशमिक स्थान मान अंक पद्धति की खोज आर्यभट्ट से तीन-चार सौ वर्ष पहले हो चुकी थी। आर्यभट्ट इस नई अंक पद्धति से परिचित थे। उन्होंने अपने ग्रंथ के शुरू में वृंद (1000000000) अर्थात् अरब तक की दश गुणोत्तर संख्या संज्ञाएँ देकर लिखा है कि इनमें प्रत्येक स्थान अपने पिछले स्थान से दश गुना है ।
आर्यभट्ट ने हमारे देश में गणित-ज्योतिष के अध्ययन की एक नई स्वास्थ्य परंपरा शुरू की। इस तरह यह कहा जा सकता है कि प्राचीन भारत ने ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में संसार को बहुत बड़ी उपलब्धि कराई।

(ड) आर्यभट्ट ने प्राचीन भारतीय विज्ञान का सबसे चमकीला सितारा क्यों कहा जाता है ?
उत्तर– आर्यभट्ट दक्षिणापथ गोदावरी तट क्षेत्र में अश्मक जनपद के रहने वाले थे, बाद में ये अश्मकाचार्य के नाम से प्रसिद्ध हुए । आर्यभट्ट बचपन से ही तेजबुद्धि थे। वे गणित और ज्योतिष के अध्ययन में गहरी रूचि लेते थे। वे इन दोनों विषयों–गणित और ज्योतिष के अध्ययन के लिए अश्मक जनपद से पाटलिपुत्र पहुंचे। इन दोनों स्थानों के मध्य की दूरी हजारों मील थी। आर्यभट्ट आँख मूँदकर पुरानी गलत बातें नहीं मानते थे। वे सदा ही अपनी विचारधारा को बिना किसी डर के और बिना किसी झिझक के प्रस्तुत कर देते थे। ग्रहण संबंधित बात ही नहीं, दूसरी भी आकाशीय घटनाओं के संबंध में स्वतंत्रतापूर्वक अपने विचार रखते थे। वे एक साहसी ज्योतिषी वैज्ञानिक थे। उन्होंने पृथ्वी की गति के बारे में अपने विचार खुलकर सबके सामने रखे थे। वे सबसे पहले ज्योतिषी थे जिन्होंने स्पष्ट रूप से अपने शब्दों में कहा कि पृथ्वी स्थिर नहीं है। यह अपनी धुरी पर चक्कर लगाती है। स्थिर तो आकाश का तारामंडल है। इसके अतिरिक्त आर्यभट्ट ने हमारे देश में गणित और ज्योतिष के अध्ययन की एक नई स्वस्थ परंपरा शुरू की। इसीलिए आर्यभट्ट को प्राचीन भारतीय विज्ञान का सबसे चमकीला सितारा कहा जाता है।

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. व्याकरण क्या है
2. वर्ण क्या हैं वर्णोंकी संख्या
3. वर्ण और अक्षर में अन्तर
4. स्वर के प्रकार
5. व्यंजनों के प्रकार-अयोगवाह एवं द्विगुण व्यंजन
6. व्यंजनों का वर्गीकरण
7. अंग्रेजी वर्णमाला की सूक्ष्म जानकारी

प्रश्न 4 वस्तुनिष्ठ प्रश्न–
रिक्त स्थानों की पूर्ति वाक्य के सामने कोष्ठक में दिए गए शब्दों से छाँटकर कीजिए–
(क) पृथ्वी अपनी धुरी पर......... से........... की ओर घूमती है।
(पूर्व, उत्तर, दक्षिण, पश्चिम)
(ख) ग्रहणों की वैज्ञानिक व्याख्या करने वाले तरुण पंडित का नाम.........था।
(चरक, आर्यभट्ट, सुश्रुत)
(ग) आर्यभट्ट की पुस्तक का नाम.......... था।
(ज्योतिष शास्त्र, गणितशास्त्र, आर्यभटीय)
उत्तर–(क) पश्चिम, पूर्व
(ख) आर्यभट्ट
(ग) आर्यभटीय।

भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1 निम्नलिखित तालिका के 'अ' भाग में कुछ शब्द दिए गए हैं। 'ब' तालिका में उनके विलोम शब्द मनमाने क्रम से दिए गए हैं, उन्हें सही क्रम में लिखिए–
तालिका 'अ' – स्वतन्त, स्थिर, आकाश, निर्भय, अंधकार, अपरान्ह।
तालिका 'ब' – भय, परतन्त्र, अस्थिर, पाताल, पूर्वान्ह, प्रकाश।
उत्तर– सही क्रम– परतन्त्र, अस्थिर, पाताल, भय, प्रकाश, पूर्वान्ह।

प्रश्न 2 निम्नलिखित वाक्यों में से उद्देश्य और विधेय अलग-अलग कीजिए–
(क) आर्यभट्ट महान् गणितज्ञ और ज्योतिषी थे।
(ख) आर्यभट्ट दक्षिणापथ में गोदावरी तट क्षेत्र के अश्मक जनपद में पैदा हुए थे।
(ग) उन्होंने अपने विचार खुलकर व्यक्त किए।
(घ) आर्यभट्टीय भारतीय गणित ज्योतिष का पहला ग्रंथ है।
उत्तर– उद्देश्य
(क) आर्यभट्ट
(ख) आर्यभट्टीय
(ग) उन्होंने
(घ) आर्यभट्टीय
विधेय–
(क) महान् गणितज्ञ और ज्योतिषी थे।
(ख) दक्षिणापथ में गोदावरी तट क्षेत्र के अश्मक जनपद में पैदा हुए थे।
(ग) अपने विचार खुलकर व्यक्त किए।
(घ) भारतीय गणित ज्योतिष का पहला ग्रंथ है।

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. लिपियों की जानकारी
2. शब्द क्या है
3. रस के प्रकार और इसके अंग
4. छंद के प्रकार– मात्रिक छंद, वर्णिक छंद
5. विराम चिह्न और उनके उपयोग
6. अलंकार और इसके प्रकार

प्रश्न 3 'विशेष' शब्द में 'वि' उपसर्ग जुड़ा हुआ है। 'प्रख्यात' शब्द में 'प्र' उपसर्ग जुड़ा हुआ है। इसी प्रकार 'वि','प्र' 'अधि' और 'अति' उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाइए–
उत्तर– (1) वि = विज्ञान, विशिष्ट, विभूति, विशेष।
(2) प्र = प्रस्तुत, प्रमुख, प्रधान, प्रख्यात।
(3) अधि = अधिसंख्य, अधिपत्र, अधिक्रम।
(4) अति = अतिदाह, अतिदीन, अतिदोष।

प्रश्न 4 निम्नलिखित प्रत्यय जोड़कर प्रत्येक के दो-दो शब्द बनाए–
ता, आई, आवट, वाला, त्व ।
उत्तर–(1) ता – सुंदरता, कुरूपता, वीरता।
(2) आई – पढ़ाई, लिखाई, पुताई, मढ़ाई, मिठाई।
(3)आवट – लिखावट, दिखावट, रंगआवट।
(4) वाला – दूधवाला, धनवाला, फलवाला,मिठाईवाला।
(5) त्व – घनत्व, विव्दत्व, शीतत्व, ग्रीष्मत्व।

प्रश्न 5 इस पाठ के समानार्थी, विरुधार्थी और पुनरुक्त शब्द अलग-अलग तालिका में लिखिए।
उत्तर– समानार्थी शब्द
बाग–बगीचे
दान–पुण्य ।
विरुधार्थी शब्द
लंबे–चौड़े
आचार्य–विद्यार्थी
आकाश–पाताल ।
पुनरुक्त शब्द
दूर-दूर
तरह-तरह
कहाँ-कहाँ।

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. शब्द क्या है- तत्सम एवं तद्भव शब्द
2. देशज, विदेशी एवं संकर शब्द
3. रूढ़, योगरूढ़ एवं यौगिकशब्द
4. लाक्षणिक एवं व्यंग्यार्थक शब्द
5. एकार्थक शब्द किसे कहते हैं ? इनकी सूची
6. अनेकार्थी शब्द क्या होते हैं उनकी सूची
7. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (समग्र शब्द) क्या है उदाहरण
8. पर्यायवाची शब्द सूक्ष्म अन्तर एवं सूची

आशा है इस पाठ की जानकारी विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी एवं महत्त्वपूर्ण होगी।
धन्यवाद।
RF Temre
infosrf.com

I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
infosrf.com


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