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पञ्चदशः पाठ:, - कूटश्लोकाः (कक्षा 8 विषय संस्कृत) || हिन्दी अनुवाद एवं प्रश्नोत्तर || Kutshlokah

कूटश्लोकौ (कूटश्लोक)

एकचक्षुः न काकोऽयं बिलमिच्छन्नपन्नगः।
क्षीयते वर्धते चैव न समुद्रो न चन्द्रमाः||१||

एकं चक्षुः अस्ति परन्तु काकः नास्ति, बिलम् अन्विष्यति परन्तु पन्नगः नास्ति, क्षयः भवति वृद्धिरपि भवति परन्तु समुद्रः नास्ति चन्द्रोऽपि नास्ति। तर्हि एतत् किम्?

हिन्दी अनुवाद-वह क्या है जिसकी एक आँख है परन्तु कौआ नहीं है, वह बिल की खोज करता है परन्तु वह साँप नहीं है, वह न तो कम होता है और न ही ज्यादा वह समुद्र नहीं है और न तो चन्द्रमा है, तो फिर यह क्या है? उत्तर - सूई।
स्पष्टीकरण- सुई में धागा पिरोने के लिए एक छेद होता है जो कि आँख का प्रतीक है अतः उसे एक आँख वाली कहा गया है। सुई कपड़े की सिलाई करते समय अन्दर भी डाली जाती है और बाहर भी निकाली जाती है। इस तरह उसे बिल खोजने वाली कहा गया है। सुई में लगा हुआ धागा जोकि सिलाई करने से कम होता है और नया धागा लगाने से बढ़ जाता है। इस तरह उसे घटने बढ़ने वाली कहा गया है।

कृष्णमुखी न मार्जारी द्विजिह्वा न च सर्पिणी।
पञ्चभर्त्री न पाञ्चाली यो जानाति स पण्डितः||२||

मुखभाग: कृष्णवर्णः वर्तते किन्तु कृष्णवर्णा मार्जारी नास्ति, द्वे जिह्वे भवतः किन्तु सर्पिणी नास्ति, पञ्च पतयः सन्ति किन्तु पाञ्चाली नास्ति। तर्हि किम् अस्ति ? यः जानाति सः पण्डित एव।

हिन्दी अनुवाद- वह वस्तु क्या है जिसका मुँह काले रंग का है किंतु वह बिल्ली नहीं है। जिसकी दो जीभ हैं, किंतु वह सर्पिणी (साँप) नहीं है। उसके पाँच पति है किंतु वह पाञ्चाली अर्थात द्रौपदी भी नहीं है। तो फिर वह क्या है? जो इसको जान ले वही ज्ञानी है।
उत्तर- लेखनी।
स्पष्टीकरण- पूर्व काल में लेखन में प्रयोग आने वाली लेखनी (पेन) काली स्याही वाले होते थे इस कारण उसे काले मुँख वाली कहा जाता है। लेखनी (पेन) में निब बीच से कटी होती है इसलिए उसे दो जीभ वाली कहा गया है। पेन को चलाने में हाथ की पाँचों अंगुलियों का प्रयोग होता है इसलिए इसके पाँच भर्ता (पति/स्वामी) वाली कहा गया है।

कूटश्लोकः(प्रश्नोत्तरम्) (कूट श्लोक - प्रश्नोत्तर सहित

कं सञ्जघान कृष्णः का शीतलवाहिनी गङ्गा।
के दारपोषणरता: कं बलवन्तं न बाधते शीतम् || ३||

कृष्णः कं जघान? ----- कंसम्
शीतलवाहिनी का? --- शीतलवाहिनी गङ्गा
दारपोषणरताः के? --- केदारपोषणरताः
शीतं कम् बाधतें? -- कम्बलवन्तम् बलवन्तम्

हिन्दी अनुवाद- कृष्ण ने किसका वध किया, शीतल जल को प्रवाहित करने वाली गङ्गा कौन है? कौन है जो पत्नी के पोषण में व्यस्त है, किस बलवान को शीत परेशान नहीं करती है?
कूटश्लोक (प्रश्न और उत्तर)
○ श्रीकृष्ण ने किसको मारा? - कंस को।
○ शीतल जल वाली गंगा कौन है? - काशी की सतह (धरती) पर बहने वाली।
○ कौन पत्नी के पोषण में रत है? - केदार (खेत) सँवारने में लगा हुआ (कृषक)
○ किस बलवान को ठण्ड परेशान नहीं करती - जिसके पास कम्बल हो उसे।

संख्याकूटश्लोकः (संख्या वाले जटिल श्लोक)

एकोनाविंशतिः स्त्रीणां स्नानार्थं नर्मदां गता विशतिः।
पुनरायाता एको व्याघ्रेण भक्षितः||४||

स्त्रीणाम् एकोनाविंशतिः (१९) स्नानार्थं नर्मदां गताव्याघ्रेण एको भक्षितः (१९ - १ = १८) विशतिः २०) पुनरायाताः! -------?
एकः ना स्त्रीणां विंशतिः (१ + २० = २१) स्नानार्थं नर्मदा गताः। व्याघ्रेण एकः भक्षितः विंशतिः पुनः आयाता (२१ - १ = २०)
उत्तरम् - (१) सूची, (२) लेखनी

हिन्दी अनुवाद- उन्नीस (एकोनाविंशतिः) स्त्रियाँ स्नान के लिए नर्मदा नदी पर गयीं। उनमें से बीस (विंशतिः) वापस आ गयीं, जबकि एक को बाघ ने खा गया?
स्पष्टीकरण - इस पहेली में 'एकोनाविशतिः स्त्रीणां स्नानार्थं नर्मदां गताः' इस पंक्ति के दो अर्थ होंगे-
(अ) एकोनाविशतिः स्त्रीणां = उन्नीस स्त्रियाँ
(ब) एको ना विशतिः स्त्रीणां = एक पुरुष (नर) और बीस (विंशतिः) स्त्रियाँ।
अन्य दूसरा अर्थ - एक पुरुष और बीस स्त्रियाँ (1 + 20 = 21) स्नान के लिए नर्मदा नदी पर गये। उनमें से बीस वापस आ गयीं, एक को बाघ खा गया (21 - 1 = 20) |

समासकूटेन चमत्कारः

अहं च त्वं च राजेन्द्र लोकनाथावुभावपि।
बहुव्रीहिरहं राजन् षष्ठी तत्पुरुषो भवान्||५||

(एक: भिक्षुकः दरिद्रः / निर्धनः महाराजम् उद्दिश्य ब्रूते)
हे राजेन्द्र ! अहं त्वं च उभौ अपि लोकनाथौ (स्वः) अहम् बहुब्रीहिः भवान् षष्ठीतत्पुरुषः। लोकः नाथः यस्य सः (भिक्षुकः) लोकस्य नाथ: (राजा)

हिन्दी अनुवाद-(एक भिक्षुक निर्धन है वह महाराज को लक्ष्य करके कहता है)
हे महाराज! मैं और तुम दोनों लोकनाथ हैं, मैं बहुब्रीहि और आप षष्ठी तत्पुरुष हैं।
स्पष्टीकरण- इस समास पर आधारित पहेली को समझने के लिए बहुब्रीहि और षष्ठी तत्पुरुष समास को समझना आवश्यक है।
यहाँ 'लोकनाथ' इस समस्त पद का बहुब्रीहि और षष्ठी तत्पुरुष समास के आधार पर विग्रह करना होगा।
बहुब्रीहि- लोकः नाथः यस्य सः (भिक्षुकः)
(संसार ही सहारा है जिसका वह- भिक्षुक है।)
षष्ठी तत्पुरुष - लोकस्य नाथः (राजा)
(संसार का स्वामी- राजा)
इस आधार पर अर्थ करने पर कि हे महाराज ! मैं और तुम दोनों लोकनाथ (अर्थात् मैं भिक्षुक और तुम राजा हो) हैं।

द्वन्द्वो द्विगुरपि चाहं मद्गृहे नित्यम् अव्ययीभावः।
तत्पुरुषः कर्मधारय येनाहं स्यां बहुब्रीहिः||६||

द्वन्द्व-द्विगु-अव्ययीभाव-तत्पुरुष-कर्मधारय- बहुब्रीहिसमासभेदान् आश्रित्य अत्र कूटश्लोके निर्धनस्य धनप्राप्त्यै पल्याः प्रार्थनायाः अद्भुतः सामाजिक भाव: निबद्धः। अत्र पत्नी धनार्जनाय अकर्मण्यं भर्तारं प्रेरयति।
(द्वन्द्वः - अहं भवता सह कलहं करोमि किल? किमर्थम्?
द्विगुः - अहं भवतः भार्या अस्मि। मम पालन पोषणं भवतः कर्त्तव्यम् अस्ति किन्तु (मद्गृहे नित्यम्)
अव्ययीभावः - प्रतिदिनं गृहे भोजनार्थम् किमपि नास्ति।
तत्पुरुष अतः हे पतिदेव! कमपि उद्योगं कुरु।
कर्म+धारय धनधान्यादिकं गृहमानय येन कारणेन (येनाहं स्याम्)
बहुव्रीहिः - अहमपि धनधान्यसम्पन्ना भवेयम्।)

हिन्दी अनुवाद- द्वन्द्व, द्विगु, अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय और बहुब्रीहि समास के भेदों पर आधारित इस कूट श्लोक में निर्धन की धन प्राप्ति के लिए पत्नी की प्रार्थना का अद्भुत सामाजिक भाव निबद्ध है। यहाँ पत्नी धन कमाने के लिए आलसी पति को प्रेरित कर रही है।
स्पष्टीकरण- मेरे घर में द्वन्द्व (लड़ाई-झगड़ा) है, द्विगु [दम्पत्ति (पति-पत्नी)] हैं, नित्य अव्ययी भाव (धन का अभाव) है। तत्पुरुष (पति) कर्मधारय (आलस्य को छोड़कर कर्म करो) जिससे मैं बहुव्रीहि (धनयुक्त) हो जाऊँ ।

शङ्करं पतितं दृष्ट्वा पार्वती हर्षनिर्भरा।
रुरुदु: पन्नगाः सर्वे हा हा शङ्कर शङ्कर||७||

अत्रापि श्लेष द्वारा अर्थः बोध्यः। शङ्करं पतितं दृष्ट्वा पार्वती प्रसन्ना भवति, सर्वाः दुःखिताः जाताः। अत्र शङ्करशब्दे पार्वतीशब्दे च श्लेषः।सर्पा: शीतलं चन्दनवृक्षं आलिङ्य मिलन्ति सः चन्दनवृक्षः प्रकृतिविकोपेन पतितः अतः निराश्रिताः पन्नगाः रुदन्ति तथा भिल्लस्त्री (मलयपर्वते) चन्दनवृक्षबाहुल्यात् चन्दनवृक्षकाष्ठम् इन्धनाय उपयुक्ते।
भिल्लस्त्री (पार्वती) पतितं चन्दनवृक्षं दृष्टवा इन्धनं लब्धमिति हर्षनिर्भरा जाता।
शङ्कर: - शिव: चन्दनवृक्षः च, पार्वती: - गौरी भिल्लस्त्री च।

हिन्दी अनुवाद- शंकर को गिरा हुआ देखकर पार्वती प्रसन्न होती हैं। सर्प रोने लगे और सभी हाय शंकर, हाय शंकर करने लगे।
यहाँ भी श्लेष द्वारा अर्थ समझने योग्य है। शंकर को गिरा हुआ देखकर पार्वती प्रसन्न होती हैं, सभी दुःखी हो जाते हैं। यहाँ शंकर शब्द में और पार्वती शब्द में श्लेष है।
स्पष्टीकरण- इस पहेली को समझने के लिए श्लेष अलंकार को समझना आवश्यक है। 'श्लेष' का अर्थ है जहाँ एक ही शब्द के दो या दो से अधिक भिन्न-भिन्न अर्थ होते हैं। यहाँ 'शंकर' और 'पार्वती' शब्दों के दो-दो अर्थ हैं। 'शंकर' का एक अर्थ भगवान शंकर है और दूसरा अर्थ चन्दन का पेड़ है। इसी प्रकार 'पार्वती' का एक अर्थ भगवान शंकर की पत्नी पार्वती है और दूसरा अर्थ पर्वत पर निवास करने वाली भीलनी है। श्लेष के अनुसार अर्थ करने पर इस श्लोक का भाव होगा। चन्दन के पेड़ को गिरा हुआ देखकर पर्वत पर निवास करने वाली भीलनी प्रसन्न होती है। सर्प रोने लगे और हाय चन्दन के पेड़, हाय चन्दन के पेड़ करने लगे।

कस्तूरी जायते कस्मात् को हन्ति करिणां कुलम्।
किं कुर्यात् कातरो युद्धे मृगात् सिंहः पलायनम् ||८||

अत्र चरणत्रये त्रयः प्रश्नाः चतुर्थे चरणे त्रयाणाम् एव उत्तरं वर्तते । कस्तूरी कस्मात् जायते इति प्रथमः प्रश्नः 'करिणां कुलं कः हन्ति' इति द्वितीयः प्रश्नः कातरः यद्धे किं कुर्यात् इति तृतीयः प्रश्नः।

हिन्दी अनुवाद- कस्तूरी किससे उत्पन्न होती है? कौन हाथियों के कुल (समूह) को मारता है? दुःखी युद्ध में क्या करे, मृग से, सिंह, पलायन।
यहाँ तीन चरणों में तीन प्रश्न हैं और चौथे चरण में तीनों के ही उत्तर हैं। कस्तूरी किससे उत्पन्न होती है ? यह पहला प्रश्न है। हाथियों के कुल (समूह) को कौन मारता है ? यह दूसरा प्रश्न है।
दुःखी युद्ध में क्या करे? यह तीसरा प्रश्न है।

स्पष्टीकरण- प्रश्न 1 - कस्तूरी किससे उत्पन्न होती है? उत्तर - मृग से।
प्रश्न 2 - हाथियों के कुल (समूह) को कौन मारता है?
उत्तर - सिंह।
प्रश्न 3 - दुःखी युद्ध में क्या करे ? उत्तर - पलायन करे (भागे)।

संस्कृत कक्षा 8 के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. वन्दना श्लोकों का हिन्दी अनुवाद (कक्षा 8 वीं) संस्कृत
2. लोकहितम मम करणीयम्- पाठ का हिंदी अनुवाद (कक्षा- 8 वीं) संस्कृत
3. अभ्यास: – प्रथमः पाठः लोकहितम मम करणीयम् (कक्षा आठवीं संस्कृत)
4. कालज्ञो वराहमिहिरः पाठ का हिन्दी अनुवाद एवं अभ्यास
5. तृतीय पाठः गणतंत्रदिवसः पाठ का अनुवाद एवं अभ्यास कार्य

शब्दार्थ-

चक्षुः= नेत्र।
पन्नगः = सर्प।
बिलम् = छेद।
जिह्वा=जीभ।
पञ्चभर्त्री = पाँच पतियों वाली।
पाञ्चाली = द्रौपदी।
जघान = मारा।
शीतलवाहिनी = शीतल जल वाली।
दारपोषणरताः = पत्नी के पोषण में तत्पर।
केदारपोषणरताः = खेत सँवारने में संलग्न (कृषक)।
कम्बलवन्तम् = किस बलवान् को।
ना = पुरुष, नर।
एकोनाविंशति= 19।
विंशतिः =20।
लोकनाथः = भिक्षुक या राजा।
(बहुव्रीहिः। सर्वोऽपि लोकः भिक्षुकस्य नाथः लोकस्य नाथः।) लोकःनाथः यस्य सः = अन्यपदार्थप्रधानो बहुब्रीहिः। लोकः सर्वोऽपि भिक्षुकस्य नाथः-लोकस्य दासःभिक्षुकः।
लोकस्य नाथः = षष्ठीतत्पुरुषसमासे कृते राजा इत्यर्थः।
द्वन्द्वः= द्वन्द्व समास, कलह।
द्विगुः= द्विगुसमास, दम्पत्ति (पति-पत्नी)।
अव्ययीभावः = समास, धनाभाव (निर्धनता)
तत्पुरुषः = समास, पति।
कर्मधारयः = समास, अकर्मण्यता छोड़कर कर्म करो।
बहुब्रीहिः = समास, धनधान्ययुक्त।
शङ्करम् = शङ्कर भगवान को/चन्दन के पेड़ को।
पतितम् = गिरते हुए।
पार्वती = पार्वती शिवपत्नी/पर्वतनिवासिनी भीलनी।
पन्नगाः = सर्प।
कस्तूरी = कस्तूरी (गन्धविशेष)।
जायते = उत्पन्न होती है।
हन्ति = मारता है।
करिणां कुलम् = हाथियों के समूह को।
कातरः = दुःखी।
युद्धे = युद्ध में।

संस्कृत कक्षा 8 के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. चतुर्थः पाठः नीतिश्लोकाः कक्षा 8 संस्कृत
2. पञ्चमः पाठः अहम् ओरछा अस्मि पाठ का हिन्दी अनुवाद एवं प्रश्नोत्तर
3. षष्ठःपाठः स्वामीविवेकानन्दः हिन्दी अनुवाद एवं अभ्यास
4. अष्टमः पाठः - यक्षप्रश्नाः (पाठ 8 यक्ष के प्रश्न)
5. नवमः पाठः वसन्तोत्सवः (संस्कृत) हिन्दी अनुवाद एवं अभ्यासः

अभ्यासः

1. एकपदेन उत्तरं लिखत-
(एक शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) प्रथमायाः प्रहेलिकायाः उत्तरं किम्?
(प्रथम पहेली का उत्तर क्या है?)
उत्तर- सूची। (सूई)
(ख) वयं कया लिखामः?
(हम किससे लिखते हैं?)
उत्तर- लेखन्या।
(पेन से)
(ग) कंसं कः सञ्जघान?
(कंस को किसने मारा?)
उत्तर- कृष्णः।
(कृष्ण ने)
(घ) कम्बलवन्तं किंन बाधते?
(कम्बल वाले को क्या परेशान नहीं करती?)
उत्तर- शीतम्।
(ठण्ड)
(ङ) कति स्त्रियः स्नानार्थ नर्मदां गताः?
(कितनी स्त्रियाँ स्नान के लिए नर्मदा नदी पर गी?)
उत्तर- विंशतिः।
(बीस)
(च) करिणां कुलं को हन्ति?
(हाथियों के समूह को कौन मारता है?)
उत्तर- सिंहः।
(शेर)

2. एकवाक्येन उत्तरं लिखत-
(एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) लेखन्याः स्वरूपं किम्?
(पेन का स्वरूप कैसा है?)
उत्तर- कृष्णमुखी द्विजिह्वा पञ्चभर्त्री च इति लेखन्याः स्वरूपम्।
(मुँह काला, दो जीभ और पाँच पति (पाँच अंगुलियों) से चलना ऐसा पेन का स्वरूप है।)
(ख) सूच्याः किं लक्षणम्?
(सूई का लक्षण क्या है?)
उत्तर- एकचक्षुः बिलम् इच्छति क्षीयते वर्धते च इति सूच्याः लक्षणम्।
(एक आँख होती है, बिल को खोजती है और घटती-बढ़ती है ये सूई की विशेषताएँ हैं।)
(ग) काशीतलवाहिनी का?
(काशी की सतह पर बहने वाली कौन है?)
उत्तर- काशीतलवाहिनी गङ्गा।
(काशी की सतह पर बहने वाली गङ्गा है।)
(घ) शीतं कं न बाधते?
(ठण्ड किसको परेशान नहीं करती?)
उत्तर- शीतं कम्बलवन्तम् न बाधते।
(कम्बल जिसके पास हो ठण्ड उसे परेशान नहीं करती।)
(ङ) नर्मदायाः कति स्त्रियः पुनरायाता:?
(नर्मदा से कितनी स्त्रियाँ वापस आयीं?)
उत्तर- नर्मदायाः विंशतिः स्त्रियः पुनरायाताः।
(नर्मदा से बीस स्त्रियाँ वापस आयीं।)
(च) शङ्करम् पतितं दृष्ट्वा पार्वती कीदृशी भवति?
(शंकर को गिरा हुआ देखकर पार्वती कैसी होती है?)
उत्तर- शङ्करम् पतितं दृष्ट्वा पार्वती हषनिर्भरा भवति।
(शंकर को गिरा हुआ देखकर पार्वती प्रसन्न होती है।)

संस्कृत कक्षा 8 के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. दशमः पाठः आजादचन्द्रशेखरः (कक्षा 8 संस्कृत) हिन्दी अनुवाद, अभ्यास एवं व्याकरण
2. सुभाषितानि (एकादश: पाठ:) संस्कृत हिन्दी अनुवाद
3. द्वादशः पाठः चित्रकूटम् (कक्षा 8 विषय संस्कृत)
4. त्रयोदशः पाठ: 'अन्तर्जालम्' (कक्षा 8 विषय- संस्कृत)
5. चतुर्दशः पाठः आचार्योपदेशाः, कक्षा 8 विषय संस्कृत, हिन्दी अनुवाद एवं प्रश्नोत्तर
6. पञ्चदशः पाठः - देवी अहिल्या, कक्षा 8 विषय संस्कृत

3. युग्मेलनं कुरुत-
(जोड़े बनाओ-)
(अ) ---------------- (ब)
(क) कंसं जघान ------- भिक्षुकः
(ख) शीतलवाहिनी ------ राजा
(ग) लोकः नाथः यस्य सः -- कृष्णः
(घ) कातरः युद्धे कुर्यात् --- मृगात्
(ङ) लोकस्य नाथः ------- कम्बलवन्तम्
(च) शीतं न बाधते ------- गङ्गा
(छ) कस्तूरी कस्मात् जायते - पलायनम्
उत्तर- सही जोड़ियाँ
(अ) ---------------- (ब)

(क) कंसं जघान -------- कृष्णः
(ख) शीतलवाहिनी ------- गङ्गा
(ग) लोकः नाथः यस्य सः -- भिक्षुकः
(घ) कातरः युद्धे कुर्यात् ---- पलायनम्
(ङ) लोकस्य नाथः -------- राजा
(च) शीतं न बाधते ------- कम्बलवन्तम्
(छ) कस्तूरी कस्मात् जायते -- मृगात्

4- रिक्त स्थानानि पूरयत-
(रिक्त स्थान भरो-)
(क) कंसं जघान कृष्णः
(ख) कं बलवन्तं न बाधते शीतम्।
(ग) तत्पुरुष कर्मधारय येनाहं स्याम बहुब्रीहिः।
(घ) शङ्करम् पतितं दृष्ट्वा पन्नगाः रुरुदुः।
(ङ) मद्गेहे नित्यम् अव्ययीभावः

5. द्वयर्थंकशब्दानाम् अर्थं लिखत
(दो अर्थ वाले शब्दों के अर्थ लिखो
उत्तर -
शब्द: ----------- अर्थ:

(क) शङ्करम् -------- चन्दनस्य वृक्षः।
(ख) द्वन्द्वः ----------- कलहः।
(ग) बहुव्रीहिः --------- धनधान्ययुक्तः।
(घ) कं बलवन्तम् ------ कम्बलयुक्तम्।
(ङ) लोकनाथः -------- भिक्षुकः।
(च) अव्ययीभावः ------ धनाभावः।
(छ) द्विगुः ------------ दम्पत्तिः।
(ज) कर्मधारयः -------- कर्म कुरु।
(झ) एको ना विंशतिः ---- एक: नरः विशति स्त्रियः।
(ञ) पचभत्र ----------- पञ्च अङ्गुल्यः।

योग्यताविस्तारः

एवमेव अन्यान् कूटश्लोकान् प्रहेलिकाः च अन्वेषयत।
सूक्त- "कूटोक्तिः वाग्वैचित्र्यम्"

संस्कृत भाषा एवं व्याकरण से संबंधित महत्वपूर्ण लिंक्स
संस्कृत शब्दावली (दैनिक जीवन में प्रयुक्त शब्द)

I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
infosrf.com

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