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गुप्त साम्राज्य का इतिहास जानने के स्रोत | Sources to know the history of Gupta Empire

  • BY:RF Temre
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भारत में चौथी शताब्दी ईस्वी की शुरुआत तक कोई विस्तृत तथा संगठित राज्य नहीं था। तत्कालीन समय में चौथी सदी ईस्वी तक कुषाण एवं शक शासकों का शासन था। किंतु इन राज्यों की शक्तियाँ क्षीण हो चुकी थीं। इसके अतिरिक्त तृतीय शताब्दी ईस्वी तक सातवाहन वंश के शासकों का शासन था, जो तीसरी सदी ईस्वी के मध्य से पहले ही समाप्त हो गया। इन परिस्थितियों में 'गुप्त राजवंश' का उदय हुआ। कुषाण शासकों का पतन होने के बाद उत्तर भारत में अनेक स्वतंत्र राजतंत्र और गणतंत्र अस्तित्व में आए। इनमें से प्रमुख राजतंत्र गुप्त, नाग, इक्ष्वाकु, आभीर एवं प्रमुख गणतंत्र मालव, आर्जुनायन, यौधेय, लिच्छवी हैं। कुषाण शासकों के पश्चात भारत में लगभग 4 शताब्दियों तक सामाजिक, धार्मिक, साहित्यिक, वैज्ञानिक तथा तकनीकी विकास जारी रहा। भारत में यह विकास गुप्त शासकों द्वारा किया गया। गुप्त वंश अपने आरंभिक काल में वर्तमान उत्तर प्रदेश तथा बिहार तक सीमित था। इन शासकों का उत्तर प्रदेश में अधिक महत्व था, क्योंकि आरंभिक गुप्त मुद्राएँ तथा अभिलेख मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश से ही प्राप्त हुए हैं। गुप्त शासक कुषाणों के सामंत रहे थे तथा ये 'वैश्य' वर्ण से संबंधित थे। गुप्त शासकों को कुषाणों से सैन्य तकनीक तथा वैवाहिक संबंध प्राप्त हुए। इन साधनों ने गुप्त साम्राज्य के विस्तार तथा सुदृढ़ीकरण में विशेष भूमिका निभाई।

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There was no elaborate and organized state in India till the beginning of 4th century AD. At that time, there was the rule of Kushan and Shaka rulers till the 4th century AD. But the powers of these states were weakened. Apart from this, the Satavahana dynasty was ruled by the rulers till the third century AD, which ended before the middle of the third century AD. Under these circumstances the 'Gupta dynasty' emerged. After the fall of the Kushan rulers, many independent monarchies and republics came into existence in North India. The major monarchies are Gupta, Naga, Ikshvaku, Abhir and major republics Malav, Arjunayan, Yaudheya, Lichchavi. After the Kushan rulers, social, religious, literary, scientific and technological development continued in India for about 4 centuries. This development in India was done by the Gupta rulers. The Gupta dynasty in its early period was limited to present-day Uttar Pradesh and Bihar. These rulers had more importance in Uttar Pradesh, because the earliest Gupta coins and inscriptions have been found mainly from Uttar Pradesh. The Gupta rulers were feudatories to the Kushanas and they belonged to the 'Vaishya' varna. The Gupta rulers received military technology and matrimonial relations from the Kushanas. These means played a special role in the expansion and consolidation of the Gupta Empire.

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गुप्त साम्राज्य का इतिहास जानने के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं-

The main sources to know the history of Gupta Empire are-

पुरातात्विक स्रोत- गुप्त साम्राज्य का इतिहास जानने के प्रमुख पुरातात्विक स्रोत अभिलेख, स्मारक तथा सिक्के हैं। गुप्त शासक समुद्रगुप्त के विषय में 'प्रयाग प्रशस्ति अभिलेख' से जानकारी मिलती है। गुप्त शासक स्कंदगुप्त ने 'सुदर्शन झील' का पुनर्निर्माण करवाया था। इसकी जानकारी हमें स्कंदगुप्त के 'जूनागढ़ अभिलेख' से मिलती है। इसके अतिरिक्त स्कंदगुप्त के 'भीतरी स्तंभलेख' से हूण आक्रमण के विषय में जानकारी प्राप्त होती है। गुप्त शासकों ने सोने, चांदी और तांबे के सिक्के चलवाए थे। तत्कालीन समय में सोने के सिक्कों को 'दिनार', चांदी के सिक्कों को 'रूपक' अथवा 'रुप्यक' एवं तांबे के सिक्कों को 'माषक' कहकर संबोधित किया जाता था। सोने के सिक्कों का सबसे बड़ा ढेर वर्तमान राजस्थान प्रांत के 'बयाना' से मिला है। गुप्तकालीन प्रमुख मंदिरों में भूमरा का शिव मंदिर (सतना, मध्य प्रदेश), तिगवा का विष्णु मंदिर (जबलपुर, मध्य प्रदेश), भीतरगाँव का मंदिर (कानपुर, उत्तर प्रदेश), नचना कुठारा का पार्वती मंदिर (पन्ना, मध्य प्रदेश), देवगढ़ का दशावतार मंदिर (झाँसी, उत्तर प्रदेश) आदि विशेष उल्लेखनीय हैं। इन सबके अतिरिक्त गुप्त काल के विभिन्न स्मारक भी प्राप्त हुए हैं। तत्कालीन समय के प्रमुख स्मारक मंदिर, मूर्तियाँ, चैत्यगृह आदि हैं, जो गुप्त कालीन कला एवं स्थापत्य की जानकारी देते हैं। अजंता और बाघ की गुफाओं के कुछ चित्र गुप्त कालीन माने जाते हैं।

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Archaeological Sources- The main archaeological sources to know the history of the Gupta Empire are inscriptions, monuments and coins. Information about the Gupta ruler Samudragupta is found from 'Prayag Prashasti Inscription'. 'Sudarshan Lake' was rebuilt by the Gupta ruler Skandagupta. We get this information from Skandagupta's Junagadh inscription. Apart from this, information about Hun invasion is obtained from Skandagupta's 'bhitari inscription'. The Gupta rulers had issued coins of gold, silver and copper. In the then gold coins 'Dinar', silver coins 'Rupaka' or 'Rupyak' and copper coins was addressed as 'Mashak'. The largest pile of gold coins has been found from 'Bayana' in present-day Rajasthan province. Major Gupta temples include the Shiva temple at Bhumra (Satna, Madhya Pradesh), the Vishnu temple at Tigwa (Jabalpur, Madhya Pradesh), the temple at Bhirgaon (Kanpur, Uttar Pradesh), the Parvati temple at Nachna Kuthara (Panna, Madhya Pradesh) , Dashavatar Temple of Deogarh (Jhansi, Uttar Pradesh) etc. are particularly noteworthy. Apart from all this, various monuments of Gupta period have also been found. The major monuments of the time are temples, statues, chaityagrihas etc., which give information about the art and architecture of the Gupta period. Some paintings of Ajanta and Tiger Caves are believed to be of Gupta period.

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साहित्यिक स्रोत- गुप्त शासक रामगुप्त और चंद्रगुप्त द्वितीय के विषय में 'देवीचंद्रगुप्तम्' नामक नाटक से जानकारी प्राप्त होती है। इसके रचयिता 'विशाखदत्त' थे। इसके अतिरिक्त गुप्त काल की जानकारी देने वाले प्रमुख साहित्यिक स्रोत ऋतुसंहार, कुमारसंभवम्, मेघदूत, मालविकाग्निमित्रम्, अभिज्ञान शाकुंतलम् हैं। इन सभी की रचना 'कालिदास' ने की थी। 'शूद्रक' कृत 'मृच्छकटिकम्' तथा 'वात्स्यायन' कृत 'कामसूत्र' प्रमुख साहित्यिक स्रोत हैं।

Literary Source- Information about the Gupta rulers Ramagupta and Chandragupta II is obtained from a play called 'Devichandraguptam'. Its author was 'Vishakhadatta'. Apart from this, the major literary sources giving information about the Gupta period are Ritusanhar, Kumarasambhavam, Meghdoot, Malavikagnimitram, Abhigyan Shakuntalam. All these were composed by 'Kalidas'. 'Shudraka''s 'Mrichhakatikam' and 'Vatsyayana''s 'Kamasutra' are the major literary sources.

विदेशी यात्रियों के विवरण- गुप्त काल में मुख्य रूप से चीनी यात्री भारत आए थे। तत्कालीन समय में भारत में आने वाले प्रमुख चीनी यात्री 'फाह्यान' तथा 'ह्वेनसांग' थे। फाह्यान गुप्त शासक चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में भारत आया था। इसने मध्य देश का वर्णन किया है। इसके अतिरिक्त चीनी यात्री ह्वेनसांग भारत आया था। इसने गुप्त शासकों कुमारगुप्त प्रथम, बुधगुप्त, नरसिंहगुप्त 'बालादित्य' आदि का वर्णन किया है। इसके विवरण से ज्ञात होता है कि कुमारगुप्त ने 'नालंदा महाविहार' की स्थापना करवाई थी।

Details of Foreign Travelers- During the Gupta period mainly Chinese travelers came to India. The major Chinese travelers to India at that time were 'Fahian' and 'Huensang'. Fahian came to India during the reign of Gupta ruler Chandragupta II. It has described the middle country. Apart from this, the Chinese traveler Huensang came to India. It describes the Gupta rulers Kumaragupta I, Budhgupta, Narasimhagupta 'Baladitya' etc. It is known from its description that Kumaragupta had established 'Nalanda Mahavihara'.

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आशा है, अध्ययन की दृष्टि से परीक्षार्थियों के लिए यह लेख महत्वपूर्ण और उपयोगी होगा।
धन्यवाद।
RF Temre
infosrf.com



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