मॉडल उत्तर पत्रक - विषय - संस्कृत, कक्षा 7th मार्च 2021 || Model Answer Sheet - Subject - Sanskrit
प्रश्न 1 – (अ) "प्राचीनभारतीय-वैज्ञानिकाः" इति पाठ आधारेण प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृते लिखत्-
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प्रश्न 1 – (अ) "प्राचीनभारतीय-वैज्ञानिकाः" इति पाठ आधारेण प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृते लिखत्-
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जलसंधि (Strait)– पानी का सकरा भाग जो दो बड़ी जल राशि जैसे समुद्रों तथा महासागरों को एक दूसरे से जोड़ती है जलसंधि कहते हैं।
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अक्षांश रेखाएँ - पृथ्वी के केंद्र से विषुवत् रेखा को आधार मानकर मापी गई कोणीय दूरी को 'अक्षांश' कहा जाता है। समान अक्षांशों को मिलाने वाली रेखा को 'अक्षांश रेखा' कहा जाता है। यह विषुवत रेखा के समानांतर खींची गई क्षैतिज रेखाएँ होती हैं। प्रति 1 डिग्री की अक्षांशीय दूरी लगभग 111 किलोमीटर होती है। पृथ्वी के प्रत्येक स्थान पर इसका मान एक जैसा नहीं होता। इसकी लंबाई में परिवर्तन होता रहता है।
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भूकंप (Earthquake) - पृथ्वी के अंतर्जाल तथा बहिर्जाल बलों की वजह से ऊर्जा निष्कासित होती है। इस प्रक्रिया के कारण तरंगे उत्पन्न होती हैं। ये सभी अलग-अलग दिशाओं में फैलकर पृथ्वी पर कंपन उत्पन्न करती हैं। इसे ही 'भूकंप' की संज्ञा दी जाती है। In practical language, the vibration of the earth due to natural phenomena is called earthquake.
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प्रश्न 1. बूझो साइकिल चलाना सीख रहा था तभी साइकिल अनियंत्रित हो जाने के कारण वह गिर पड़ा और उसे घुटने में चोट लग गई, चोट वाले स्थान से रक्त बहने लगा। कुछ समय बाद उसने देखा कि रक्त का बहना अपने आप रुक गया और चोट वाले स्थान पर गहरे लाल रंग का एक थक्का जम गया। बूझो यह देखकर आश्चर्य चकित है। बूझो के कुछ प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
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(अ) क्या कारण है कि कृषि अफ्रीका के निवासियों का मुख्य व्यवसाय होते हुए भी यह महाद्वीप कृषि के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है?
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ज्वार-भाटा सदैव समुद्री सतह पर उत्पन्न होता है। इसकी उत्पत्ति का कारण सूर्य तथा चंद्रमा के आकर्षण बल एवं पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल तथा अपकेंद्रण बल के प्रभाव के कारण होती है। समुद्री जल स्तर के ऊपर उठने को 'ज्वार' कहा जाता है एवं उसके नीचे गिरने को 'भाटा' कहा जाता है।
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जांतव रेशे (Animal Fibers)– रेशम कीट से रेशम तथा भेड़, बकरी एवं याक से ऊन प्राप्त की जाती है। अतः रेशम और उन जांतव रेशे हैं।
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अर्थ के आधार पर शब्दों के प्रकार के दो खण्ड किए जा सकते हैं। 'खंड 1' में साहित्य शास्त्रियों एवं विद्वानों ने तीन भेद किए हैं।
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मध्यप्रदेश के भोपाल, रायसेन, नेमावर, मोजावाड़ी, छनेरा, महेश्वर, देहगाँव, हंडिया, कबरा, बरखेड़ा, सिघनपुर, पचमढ़ी, आजमगढ़, होशंगाबाद, सागर एवं मंदसौर की अनेक स्थानों पर इन लोगों की निवास करने के प्रमाण प्राप्त हुए हैं। इस काल के लोगों में कलात्मक अभिरुचि थी। होशंगाबाद के पास की गुफाओं, भोपाल के पास भीमबेटका की कंदराओं और सागर के पास पहाड़ियों से शैलचित्र प्राप्त हुए हैं, जो कि उनकी कलात्मक अभिरुचि के प्रमाण हैं। शैलचित्र मंदसौर की शिवनी नदी के निकट की पहाड़ियों, रायसेन, नरसिंहगढ़, पन्ना, रीवा, आजमगढ़, रायगढ़ तथा अंबिकापुर के कंदराओं में प्राप्त हुए हैं।
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