"वन्दे मातरम्" राष्ट्रीय गीत का हिन्दी अनुवाद || Hindi translation of "Vande Mataram" national song
राष्ट्रीय-गीत 'वन्दे मातरम्' की प्रारंभिक पंक्तियाँ जिनका प्रयोग विद्यालयों में प्रातः-कालीन या सायं-कालीन प्रार्थना-सभा में गायन हेतु किया जाता है। विद्यार्थियों द्वारा सुर-ताल के साथ इस राष्ट्रीय गीत का गायन होता है किंतु इसके भावार्थ की समझ सभी को नहीं होती है। गीत का क्या भाव है इसमें क्या कहा गया है, यहाँ भावार्थ दिया गया है। यह विद्यार्थियों, शिक्षकों के लिए काफी उपयोगी और महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय-गीत (विद्यालयों में गाये जाने वाले पद)
वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम्।
सुजलाम् सुफलाम् मलयज शीतलाम्।
शस्य श्यामलाम् मातरम्।
वन्दे मातरम्।।
शुभ्रज्योत्स्नाम् पुलकित यामिनीम्।
फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्॥
सुहासिनीम् सुमधुरभाषिणीम्।
सुखदाम् वरदाम् मातरम्।
वन्दे मातरम्।
वंदे मातरम् (संपूर्ण गीत)
वन्दे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलाम् मातरम्।
वन्दे मातरम्॥
शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्।
वन्दे मातरम्॥
कोटि-कोटि कंठ कल-कल-निनाद-कराले,
कोटि-कोटि भुजैर्धृत-खरकरवाले।
अबला केन मा एत बले,
बहुबलधारा मातरम्।
वन्दे मातरम्॥
तव करुणारुण-राग-अनुरागिणीम्,
तव वर-विभव-वर्ण-बरिणीम्,
सुजलां सुफलां मातरम्।
वन्दे मातरम्॥
तुमि विद्या तुमि धर्म,
तुमि हृदि तुमि मर्म,
त्वम् हि प्राणा: शरीरे।
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदयते तुमि मा भक्ति,
तोमारै प्रतिमा गढ़ि,
मन्दिरे-मन्दिरे।
वन्दे मातरम्॥
वंदे मातरम् गीत हिन्दी अनुवाद
वन्दे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलाम् मातरम्।
वन्दे मातरम्॥
सरल हिन्दी भावार्थ – हम अपनी मातृभूमि की वन्दना करते हैं। हे मातृभूमि! मैं तुम्हें नमन करता हूँ। तुम शीतल जल से भरपूर, सुस्वादु फलों से युक्त हो और शीतल हवाओं से सुवासित हो। तुम हरे-भरे खेतों और जीवनदायिनी धरती से सम्पन्न हो। मेरी मातृभूमि मलयागिरि के चन्दन के समान शीतलता प्रदान करने वाली है। मेरी मातृभूमि अपनी फसलों (खाद्यान्न) एवं वनस्पतियों से हरी-भरी है। मैं इस मातृभूमि को वन्दन करता हूँ।
शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्।
वन्दे मातरम्॥
सरल हिन्दी भावार्थ – इस धरती माता की चांदनी रातें (पूर्ण चंद्र) मन को पुलकित करती हैं तथा खिले हुए पुष्पों एवं लताओं से सुशोभित तुम्हारे वन, फूलों से लदे पेड़ अत्यन्त सुंदर हैं जो प्रसन्नचित प्रतीत हो रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि इस धरती माँ की प्राकृतिक सम्पदा को पाकर मातृभूमि हम सभी से मधुर संभाषण (वार्तालाप) करने को उत्कंठित (आतुर) है। तुम मुस्कुराती हो, मधुर भाषा बोलती हो, सुख देने वाली और वरदान देने वाली माँ के समान हो। तुम्हारे वचनों में निर्मलता है, तुम्हारा जल शीतल है, तुम अनंत दया की धनी हो। हमारी यह मातृभूमि हम सभी को सुख समृद्धि (आनन्द) का वरदान देने वाली है। मैं अपनी इस मातृभूमि की वन्दना करता हूँ। हे माँ तुम्हे नमस्कार है।
कोटि-कोटि कंठ कल-कल-निनाद-कराले,
कोटि-कोटि भुजैर्धृत-खरकरवाले।
अबला केन मा एत बले,
बहुबलधारा मातरम्।
वन्दे मातरम्॥
सरल हिन्दी भावार्थ – तुम्हारे लिए करोड़ों लोगों की आवाज़ें (जयघोष) भीषण ध्वनि उत्पन्न करती हैं, करोड़ों हाथ तुम्हारे रक्षार्थ हथियार उठाते हैं। माँ, तुम निर्बल (अबला) कैसे हो सकती हो? तुम तो अपार शक्ति (असंख्य बल) की धारा हो। हे माता, मैं तुम्हें नमन करता हूँ!
तव करुणारुण-राग-अनुरागिणीम्,
तव वर-विभव-वर्ण-बरिणीम्,
सुजलां सुफलां मातरम्।
वन्दे मातरम्॥
सरल हिन्दी भावार्थ – तुम्हारी करुणा में सूर्योदय के समान पवित्र लाली का प्रेम समाया हुआ है, और तुम्हारा उत्कृष्ट ऐश्वर्य सभी रंगों से सुशोभित है। हे माँ! उत्तम जल से युक्त और उत्तम फलों से समृद्ध हो। तुम हे माता, मैं तुम्हें नमन करता हूँ!
तुमि विद्या तुमि धर्म,
तुमि हृदि तुमि मर्म,
त्वम् हि प्राणा: शरीरे।
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदयते तुमि मा भक्ति,
तोमारै प्रतिमा गढ़ि,
मन्दिरे-मन्दिरे।
वन्दे मातरम्॥
सरल हिन्दी भावार्थ – माँ तुम ही ज्ञान (विद्या) हो, तुम ही धर्म हो, तुम ही हृदय की भावना और जीवन का सार (मर्म) हो। तुम ही वास्तव में शरीर में प्राण हो। भुजाओं में तुम ही माँ शक्ति हो, हृदय में तुम ही माँ भक्ति हो। तुम्हारी ही प्रतिमा हम हर मंदिर में स्थापित करते हैं। हे माता, मैं तुम्हें नमन करता हूँ!
स्वर/छंद के अनुसार फॉर्मेट
(गीत जैसा विन्यास)
वन्दे मातरम्
वन्दे मातरम्
सुजलां सुफलां
मलयज-शीतलाम्
शस्य-श्यामलाम्
मातरम्
वन्दे मातरम्
शुभ्र-ज्योत्स्ना-पुलकित-यामिनीम्
फुल्ल-कुसुमित-द्रुम-दल-शोभिनीम्
सुहासिनीं सुमधुर-भाषिणीम्
सुखदां वरदां मातरम्
वन्दे मातरम्
कोटि-कोटि-कंठ-कलकल-निनाद-कराले
कोटि-कोटि-भुजैर्घृत-खरकरवाले
अबला केन मा एत बले
बहुबलधारा मातरम्
वन्दे मातरम्
तव करुणारुण-राग-अनुरागिणीम्
तव वर-विभव-वर्ण-बरिणीम्
सुजलां सुफलां मातरम्
वन्दे मातरम्
तुमि विद्या तुमि धर्म
तुमि हृदि तुमि मर्म
त्वम् हि प्राणा: शरीरे
बाहुते तुमि मा शक्ति
हृदयते तुमि मा भक्ति
तोमारै प्रतिमा गढ़ि
मन्दिरे-मन्दिरे
वन्दे मातरम्
रचयिता
श्री बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय
आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope the above information will be useful and important. )
Thank you.
लेखक
(Writer)
infosrf.com
पाठकों की टिप्पणियाॅं (1)
Leave a reply
अन्य महत्वपूर्ण जानकारी से संबंधित लिंक्स👇🏻
हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. शब्द– तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी | रुढ़, यौगिक और योगरूढ़ | अनेकार्थी, शब्द समूह के लिए एक शब्द
2. हिन्दी शब्द- पूर्ण पुनरुक्त शब्द, अपूर्ण पुनरुक्त शब्द, प्रतिध्वन्यात्मक शब्द, भिन्नार्थक शब्द
3. मुहावरे और लोकोक्तियाँ
4. समास के प्रकार | समास और संधि में अन्तर | What Is Samas In Hindi
5. संधि - स्वर संधि के प्रकार - दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि
हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. व्यंजन एवं विसर्ग संधि | व्यंजन एवं संधि निर्माण के नियम
2. योजक चिह्न- योजक चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ, कब और कैसे होता है?
3. वाक्य रचना में पद क्रम संबंधित नियम
4. द्विरुक्ति शब्द क्या हैं? द्विरुक्ति शब्दों के प्रकार
5. प्रेरणार्थक / प्रेरणात्मक क्रिया क्या है ? || इनका वाक्य में प्रयोग
हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. पूर्ण विराम का प्रयोग कहाँ होता है || निर्देशक एवं अवतरण चिह्न के उपयोग
2. शब्द शक्ति- अभिधा शब्द शक्ति, लक्षणा शब्द शक्ति एवं व्यंजना शब्द शक्ति
3. रस क्या है? || रस के स्थायी भाव || शान्त एवं वात्सल्य रस
4. रस के चार अवयव (अंग) – स्थायीभाव, संचारी भाव, विभाव और अनुभाव
5. छंद में मात्राओं की गणना कैसे करते हैं?
हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. घनाक्षरी छंद और इसके उदाहरण
2. काव्य में 'प्रसाद गुण' क्या होता है?
3. अपहनुति अलंकार किसे कहते हैं? || विरोधाभास अलंकार
4. भ्रान्तिमान अलंकार, सन्देह अलंकार, पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार
5. समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द– अपेक्षा, उपेक्षा, अवलम्ब, अविलम्ब शब्दों का अर्थ
हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. प्रबंध काव्य और मुक्तक काव्य क्या होते हैं?
2. कुण्डलियाँ छंद क्या है? इसकी पहचान एवं उदाहरण
3. हिन्दी में मिश्र वाक्य के प्रकार (रचना के आधार पर)
4. मुहावरे और लोकोक्ति का प्रयोग कब और क्यों किया जाता है?
5. राष्ट्रभाषा क्या है और कोई भाषा राष्ट्रभाषा कैसे बनती है? || Hindi Rastrabha का उत्कर्ष
हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. अर्थ के आधार पर वाक्य के प्रकार
2. भाषा के विविध स्तर- बोली, विभाषा, मातृभाषा || भाषा क्या है?
3. अपठित गद्यांश क्या होता है और किस तरह हल किया जाता है
4. वाच्य के भेद - कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य
5. भाव-विस्तार (भाव-पल्लवन) क्या है और कैसे किया जाता है?
हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. मध्यप्रदेश की प्रमुख बोलियाँ एवं साहित्य- पत्र-पत्रिकाएँ
2. छंद किसे कहते हैं? || मात्रिक - छप्पय एवं वार्णिक छंद - कवित्त, सवैया
3. काव्य गुण - ओज-गुण, प्रसाद-गुण, माधुर्य-गुण
4. अलंकार – ब्याज-स्तुति, ब्याज-निन्दा, विशेषोक्ति, पुनरुक्ति प्रकाश, मानवीकरण, यमक, श्लेष
5. रसों का वर्णन - वीर, भयानक, अद्भुत, शांत, करुण
हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. संज्ञा क्या है? | संज्ञा के प्रकार– व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, द्रव्यवाचक, समूहवाचक, भाववाचक
2. संज्ञा से सर्वनाम, विशेषण और क्रिया कैसे बनते हैं?
3. सर्वनाम क्या है? | संज्ञा और सर्वनाम में अन्तर || सर्वनाम के प्रकार
4. पुरूषवाचक सर्वनाम – उत्तमपुरूष, मध्यमपुरूष और अन्यपुरूष
5. निजवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?
हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. निश्चयवाचक सर्वनाम और अनिश्चयवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?
2. सम्बन्धवाचक सर्वनाम और प्रश्नवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?
3. संयुक्त सर्वनाम क्या होते हैं?
4. विशेषण किसे कहते हैं? | विशेषण के प्रकार एवं उसकी विशेषताएँ
5. गुणवाचक विशेषण और संकेतवाचक (सार्वनामिक) विशेषण
हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. संख्यावाचक विशेषण | निश्चित और अनिश्चित विशेषण || पूर्णांकबोधक और अपूर्णांकबोधक विशेषण
2. कार्यालयों में फाइलिंग (नस्तीकरण) क्या है?







ANKIT MAURYA ANKIT (Student)
Posted on November 21, 2025 07:11PM from Practical , Utter pradesh
Isme agar pure ka anuwaad kar dete hai to sahi regega Thank-you