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"वन्दे मातरम्" राष्ट्रीय गीत का हिन्दी अनुवाद || Hindi translation of "Vande Mataram" national song


"वन्दे मातरम्" राष्ट्रीय गीत का हिन्दी अनुवाद || Hindi translation of "Vande Mataram" national song

उप शीर्षक:
"वन्दे मातरम्" राष्ट्रीय गीत की प्रारंभिक पंक्तियाँ जो कि विद्यालयों में प्रातः कालीनया सायं कालीन प्रार्थना सभा में गाई जाती है का हिन्दी अनुवाद पढ़ें।
Slug (कॉपी करें):
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मेटा टाइटल:
वंदे मातरम् राष्ट्रीय गीत: बोल, भावार्थ, संपूर्ण अर्थ और रचयिता - Vande Mataram
मेटा डिस्क्रिप्शन:
राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के प्रारंभिक (विद्यालयों में गाए जाने वाले) और संपूर्ण पदों के बोल। जानें बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय रचित इस गीत का छंद/स्वर विन्यास और विस्तृत सरल हिन्दी भावार्थ।
लेख का सारांश:
यह लेख राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' पर केंद्रित है, जिसका उपयोग विद्यालयों में प्रार्थना सभाओं में किया जाता है। इसमें गीत की प्रारंभिक पंक्तियाँ, संपूर्ण संस्कृत पाठ और उसका विस्तृत सरल हिन्दी भावार्थ दिया गया है। भावार्थ खंड, विद्यार्थियों और शिक्षकों को गीत के गहरे अर्थ और महत्व को समझने में मदद करता है। गीत की संरचना, छंद/स्वर के अनुसार विन्यास और इसके रचयिता श्री बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का उल्लेख भी किया गया है।
विषय क्षेत्र:
राष्ट्रीय/देशभक्ति गीत, भारतीय साहित्य, शिक्षा और संस्कृति, संस्कृत गीत का हिन्दी अनुवाद
जानकारी का स्रोत:
श्री बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित 'आनंद मठ' उपन्यास से लिया गया राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्'

राष्ट्रीय-गीत 'वन्दे मातरम्' की प्रारंभिक पंक्तियाँ जिनका प्रयोग विद्यालयों में प्रातः-कालीन या सायं-कालीन प्रार्थना-सभा में गायन हेतु किया जाता है। विद्यार्थियों द्वारा सुर-ताल के साथ इस राष्ट्रीय गीत का गायन होता है किंतु इसके भावार्थ की समझ सभी को नहीं होती है। गीत का क्या भाव है इसमें क्या कहा गया है, यहाँ भावार्थ दिया गया है। यह विद्यार्थियों, शिक्षकों के लिए काफी उपयोगी और महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रीय-गीत (विद्यालयों में गाये जाने वाले पद)

वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम्।
सुजलाम् सुफलाम् मलयज शीतलाम्।
शस्य श्यामलाम् मातरम्।
वन्दे मातरम्।।
शुभ्रज्योत्स्नाम् पुलकित यामिनीम्।
फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्॥
सुहासिनीम् सुमधुरभाषिणीम्।
सुखदाम् वरदाम् मातरम्।
वन्दे मातरम्।

वंदे मातरम् (संपूर्ण गीत)

वन्दे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलाम् मातरम्।
वन्दे मातरम्॥

शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्।
वन्दे मातरम्॥

कोटि-कोटि कंठ कल-कल-निनाद-कराले,
कोटि-कोटि भुजैर्धृत-खरकरवाले।
अबला केन मा एत बले,
बहुबलधारा मातरम्।
वन्दे मातरम्॥

तव करुणारुण-राग-अनुरागिणीम्,
तव वर-विभव-वर्ण-बरिणीम्,
सुजलां सुफलां मातरम्।
वन्दे मातरम्॥

तुमि विद्या तुमि धर्म,
तुमि हृदि तुमि मर्म,
त्वम् हि प्राणा: शरीरे।
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदयते तुमि मा भक्ति,
तोमारै प्रतिमा गढ़ि,
मन्दिरे-मन्दिरे।
वन्दे मातरम्॥

वंदे मातरम् गीत हिन्दी अनुवाद

वन्दे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलाम् मातरम्।
वन्दे मातरम्॥

सरल हिन्दी भावार्थ – हम अपनी मातृभूमि की वन्दना करते हैं। हे मातृभूमि! मैं तुम्हें नमन करता हूँ। तुम शीतल जल से भरपूर, सुस्वादु फलों से युक्त हो और शीतल हवाओं से सुवासित हो। तुम हरे-भरे खेतों और जीवनदायिनी धरती से सम्पन्न हो। मेरी मातृभूमि मलयागिरि के चन्दन के समान शीतलता प्रदान करने वाली है। मेरी मातृभूमि अपनी फसलों (खाद्यान्न) एवं वनस्पतियों से हरी-भरी है। मैं इस मातृभूमि को वन्दन करता हूँ।

शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्।
वन्दे मातरम्॥

सरल हिन्दी भावार्थ – इस धरती माता की चांदनी रातें (पूर्ण चंद्र) मन को पुलकित करती हैं तथा खिले हुए पुष्पों एवं लताओं से सुशोभित तुम्हारे वन, फूलों से लदे पेड़ अत्यन्त सुंदर हैं जो प्रसन्नचित प्रतीत हो रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि इस धरती माँ की प्राकृतिक सम्पदा को पाकर मातृभूमि हम सभी से मधुर संभाषण (वार्तालाप) करने को उत्कंठित (आतुर) है। तुम मुस्कुराती हो, मधुर भाषा बोलती हो, सुख देने वाली और वरदान देने वाली माँ के समान हो। तुम्हारे वचनों में निर्मलता है, तुम्हारा जल शीतल है, तुम अनंत दया की धनी हो। हमारी यह मातृभूमि हम सभी को सुख समृद्धि (आनन्द) का वरदान देने वाली है। मैं अपनी इस मातृभूमि की वन्दना करता हूँ। हे माँ तुम्हे नमस्कार है।

कोटि-कोटि कंठ कल-कल-निनाद-कराले,
कोटि-कोटि भुजैर्धृत-खरकरवाले।
अबला केन मा एत बले,
बहुबलधारा मातरम्।
वन्दे मातरम्॥

सरल हिन्दी भावार्थ – तुम्हारे लिए करोड़ों लोगों की आवाज़ें (जयघोष) भीषण ध्वनि उत्पन्न करती हैं, करोड़ों हाथ तुम्हारे रक्षार्थ हथियार उठाते हैं। माँ, तुम निर्बल (अबला) कैसे हो सकती हो? तुम तो अपार शक्ति (असंख्य बल) की धारा हो। हे माता, मैं तुम्हें नमन करता हूँ!

तव करुणारुण-राग-अनुरागिणीम्,
तव वर-विभव-वर्ण-बरिणीम्,
सुजलां सुफलां मातरम्।
वन्दे मातरम्॥

सरल हिन्दी भावार्थ – तुम्हारी करुणा में सूर्योदय के समान पवित्र लाली का प्रेम समाया हुआ है, और तुम्हारा उत्कृष्ट ऐश्वर्य सभी रंगों से सुशोभित है। हे माँ! उत्तम जल से युक्त और उत्तम फलों से समृद्ध हो। तुम हे माता, मैं तुम्हें नमन करता हूँ!

तुमि विद्या तुमि धर्म,
तुमि हृदि तुमि मर्म,
त्वम् हि प्राणा: शरीरे।
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदयते तुमि मा भक्ति,
तोमारै प्रतिमा गढ़ि,
मन्दिरे-मन्दिरे।
वन्दे मातरम्॥

सरल हिन्दी भावार्थ – माँ तुम ही ज्ञान (विद्या) हो, तुम ही धर्म हो, तुम ही हृदय की भावना और जीवन का सार (मर्म) हो। तुम ही वास्तव में शरीर में प्राण हो। भुजाओं में तुम ही माँ शक्ति हो, हृदय में तुम ही माँ भक्ति हो। तुम्हारी ही प्रतिमा हम हर मंदिर में स्थापित करते हैं। हे माता, मैं तुम्हें नमन करता हूँ!

स्वर/छंद के अनुसार फॉर्मेट
(गीत जैसा विन्यास)

वन्दे मातरम्
वन्दे मातरम्

सुजलां सुफलां
मलयज-शीतलाम्
शस्य-श्यामलाम्
मातरम्
वन्दे मातरम्

शुभ्र-ज्योत्स्ना-पुलकित-यामिनीम्
फुल्ल-कुसुमित-द्रुम-दल-शोभिनीम्
सुहासिनीं सुमधुर-भाषिणीम्
सुखदां वरदां मातरम्
वन्दे मातरम्

कोटि-कोटि-कंठ-कलकल-निनाद-कराले
कोटि-कोटि-भुजैर्घृत-खरकरवाले
अबला केन मा एत बले
बहुबलधारा मातरम्
वन्दे मातरम्

तव करुणारुण-राग-अनुरागिणीम्
तव वर-विभव-वर्ण-बरिणीम्
सुजलां सुफलां मातरम्
वन्दे मातरम्

तुमि विद्या तुमि धर्म
तुमि हृदि तुमि मर्म
त्वम् हि प्राणा: शरीरे
बाहुते तुमि मा शक्ति
हृदयते तुमि मा भक्ति
तोमारै प्रतिमा गढ़ि
मन्दिरे-मन्दिरे
वन्दे मातरम्

रचयिता
श्री बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय


आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope the above information will be useful and important. )
Thank you.
लेखक
(Writer)
infosrf.com

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पाठकों की टिप्पणियाॅं (1)

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    ANKIT MAURYA ANKIT (Student)

    Isme agar pure ka anuwaad kar dete hai to sahi regega Thank-you

    Reply

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