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कनौज पर शासन के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष | Tripartite struggle for rule over Kanauj


कनौज पर शासन के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष | Tripartite struggle for rule over Kanauj

उप शीर्षक:
भारतवर्ष से सम्राट हर्षवर्धन का शासन समाप्त होने के बाद कन्नौज विभिन्न शासकों की शक्तियों का केंद्र बन गया।

भारतवर्ष से सम्राट हर्षवर्धन का शासन समाप्त होने के बाद कन्नौज विभिन्न शासकों की शक्तियों का केंद्र बन गया। लगभग आठवीं शताब्दी के दौरान कन्नौज पर स्वामित्व प्राप्त करने के लिये प्राचीन भारत की तीन बड़ी शक्तियों के मध्य संघर्ष आरंभ हुआ। यह संघर्ष लगभग 200 वर्षों तक चला। इस संघर्ष में सम्मिलित होने वाली प्रमुख शासक शक्तियाँ निम्नलिखित हैं-
1. पाल
2. प्रतिहार
3. राष्ट्रकूट के

Kannauj became the center of power of various rulers after the end of the reign of Emperor Harshavardhana from India. During about the eighth century, a struggle started between the three great powers of ancient India to get ownership over Kanauj. This struggle lasted for almost 200 years. Following are the major ruling powers involved in this struggle-
1. Pal
2. Pratihara
3. Rashtrakuta's

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कन्नौज पर अधिकार प्राप्त करने के लिये संघर्ष का प्रारंभ सर्वप्रथम पाल वंश के शासक धर्मपाल ने किया। इस तीन पक्षों के संघर्ष का कोई निश्चित परिणाम नहीं निकल पाया। यह संघर्ष कई चरणों में संपन्न हुआ। इस संघर्ष का प्रथम चरण पाल शासक धर्मपाल, प्रतिहार शासक वत्सराज एवं राष्ट्रकूट शासक ध्रुव के मध्य सम्पन्न हुआ था।

The struggle to get rights over Kanauj was first started by the ruler of Pala dynasty, Dharmapala. The struggle of these three parties did not yield any definite result. This struggle took place in several phases. The first phase of this struggle was completed between Pala ruler Dharmapala, Pratihara ruler Vatsaraja and Rashtrakuta ruler Dhruv.

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इस तीन पक्षों के संघर्ष के परिणामस्वरूप कन्नौज पर अंतिम रूप से गुर्जर प्रतिहार शासकों ने अधिकार प्राप्त कर लिया।

Kanauj was finally conquered by Gurjara Pratihara rulers as a result of the struggle of this three parties.

आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों / विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
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