भारत का भूगोल : मृदा अपरदन (Geography of India : Soil Erosion)
मृदा अपरदन के कारण (Reasons of soil erosion) :
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मृदा अपरदन के कारण (Reasons of soil erosion) :
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स्टाक रजिस्टर के प्रकार (Types of stock registers) :-
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कौशल आधारित लिखित प्रश्न खण्ड 'ब' पूर्णांक- 30
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Skill Based Written Questions Section 'A'
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मृदा से तात्पर्य पृथ्वी की ऊपरी परत से है, जिसे सामान्य भाषा में 'मिट्टी' कहा जाता है। मृदा हमारे लिए बहुत आवश्यक है। यह पौधों की वृद्धि हेतु प्राकृतिक स्रोत के रूप में पौधों को जल, खनिज लवण एवं अन्य पोषक तत्व प्रदान करती है। मृदा पृथ्वी की ऊपरी परत है, जो कि खनिज कणों और जीवाश्म का मिश्रण है। यह लाखों वर्षों में निर्मित हुई है। सामान्य रूप से मिट्टी की कई परतें होती हैं।
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मृदा से तात्पर्य पृथ्वी की ऊपरी परत से है, जिसे सामान्य भाषा में 'मिट्टी' कहा जाता है। मृदा हमारे लिए बहुत आवश्यक है। यह पौधों की वृद्धि हेतु प्राकृतिक स्रोत के रूप में पौधों को जल, खनिज लवण एवं अन्य पोषक तत्व प्रदान करती है। मृदा पृथ्वी की ऊपरी परत है, जो कि खनिज कणों और जीवाश्म का मिश्रण है। यह लाखों वर्षों में निर्मित हुई है। सामान्य रूप से मिट्टी की कई परतें होती हैं।
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भारत की जलवायु 'मानसूनी' है। जलवायु की दशाओं में समरूपता जलवायु के कारकों के संयुक्त प्रभाव से उत्पन्न होती हैं। वर्षा और तापमान जलवायु के दो महत्वपूर्ण कारक है। इन्हें जलवायु वर्गीकरण की पद्धतियों में निर्णायक कहा जाता है। जलवायु वर्गीकरण की कई पद्धतियाँ हैं। इन पद्धतियों में से 'कोपेन' का जलवायु वर्गीकरण प्रमुख है। इन्होंने जलवायु वर्गीकरण के लिए वर्षा और तापमान को मुख्य आधार बनाया था।
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