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संप्रेषण क्या है? इसकी महत्ता What is communication? Its Importance.

संप्रेषण तकनीकी की 'रीढ़ की हड्डी' है। बिना संप्रेषण के शिक्षण एवं अधिगम दोनों की ही कल्पना नहीं की जा सकती। संप्रेषण का अर्थ है परस्पर सूचनाओं तथा विचारों का आदान -प्रदान करना। एक शिक्षक होने के नाते जब हम अपने प्रधानाचार्य से या फिर छात्रों से कुछ कहते या छात्र हमें कुछ बताते हैं, प्रत्युत्तर देते हैं, आदेश देते हैं, प्रशंसा या आलोचना करते हैं तो इसका तात्पर्य है कि संप्रेषण की प्रक्रिया जारी है।

संप्रेषण के उद्देश्य

संप्रेषण के उद्देश्य-

प्रेरणा देना, सूचना देना, सूचित करना, चेतावनी देना, व्यवहार में परिवर्तन लाना, सुझाव देना व अधिगम को अर्थपूर्ण तथा समझ से युक्त बनाना होता है।

प्रमुख उद्देश्य

(1) द्विमार्गीय संप्रेषण की व्यवस्था करना।

(2) विचारों को कार्य रुप प्रदान करना।

(3) व्यवहारों एवं व्याख्याओं से परिचित कराना।

(4) समन्वय स्थापित करना।

(5) आदेशों एवं निर्देशौं का संप्रेषण।

संप्रेषण के प्रकार

(1) शाब्दिक संप्रेषण

(2) अशाब्दिक संप्रेषण

शाब्दिक संप्रेषण-

यह संप्रेषण मौखिक रूप में वाणी द्वारा तथा लिखित रूप में शब्दों अथवा संकेतों के द्वारा, विचार एवं भावनाओं को दूसरों के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

शाब्दिक संप्रेषण को पुनः दो प्रकार के संप्रेषणों में वर्गीकृत किया जा सकता है-

(अ) मौखिक संप्रेषण

(ब) लिखित संप्रेषण

मौखिक संप्रेषण- इसमें वार्ता, व्याख्या, परिचर्चा, सामूहिक परिचर्चा, प्रश्न उत्तरों तथा कहानी आदि के माध्यम से विचारों की अभिव्यक्ति की जाती है।

लिखित संप्रेषण- इसमें लिखित संदेशों की सुग्राह्ता के लिए जरूरी है कि लिखित भाषा सरल, सुगम, स्पष्ट तथा बोधगम्य हो, ताकि ग्रहण कर्ता बिना किसी भ्रम के पूर्ण रूप में ग्रहण कर सके।

अशाब्दिक संप्रेषण- इसमें भाषा का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसमें वाणी संकेत, चक्षु संपर्क तथा मुख मुद्राओं के प्रयोग एवं स्पर्श संपर्क आदि प्रमुख प्रकार के संप्रेषण होते हैं।

कक्षा में संप्रेषण

संप्रेषण ही एक ऐसा सबसे प्रमुख माध्यम है जो शिक्षक तथा विद्यार्थियों को एक साथ बांधे रखने में उन्हें प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाता है। अत: हम ये कह सकते हैं कि शैक्षिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए की गई बातें, चर्चाएं (शिक्षक व छात्र के बीच) को ही कक्षा संप्रेषण की संज्ञा देंगे।

संप्रेषण में बाधाएं-

(1) भौतिक बाधाएं- शोर, अदृशयता, वातावरण व भौतिक असुविधाएँ, खराब स्वास्थ्य, ध्यान केंद्रित न होना।

(2) भाषा की बाधाएं- अस्पष्ट शब्द, अनावश्यक शब्द।

(3) मनोवैज्ञानिक बाधाएँ- अरुचि, अत्याधिक चिंतन, अलाभकारी अनुभव।

संप्रेषण का निराकरण- (प्रभावशाली संप्रेषण हेतु निराकरण)

(1) यथा संभव हमें सरल, सुगम, सुबोध एवं स्पष्ट भाषा का प्रयोग करना चाहिए।

(2) संप्रेषण में देरी करने वाले तत्वों पर पूरी नजर होनी चाहिए।

(3) सुनने की अच्छी आदत होनी चाहिए।

(4) लिखे हुए संदेशों को सही रूप से अध्ययन करना चाहिए।

इस तरह संप्रेषण मानव समाज के व्यवस्थित संचालन, ज्ञान के प्रचार-प्रसार एवं उत्तरोत्तर प्रगति करने का साधन है।

What is communication? Its Importance

Communication is the backbone of Technology. Without communication both teaching and learning cannot be imagined. Communication means the exchange of Information and ideas. As a teacher when we say something to our principal or to students or students tell us something, respond, order, praise or criticize, it means that the process of communication is going on.

Purpose of communication :-

The objectives of communication are to inspire, inform, worn, change behaviour, suggest and make learning meaningful and understandable.

key objectives :-

1. To arrange two way communication.

2. To make ideas work.

3. To introduce you to practices and interpretations.

4. Co-ordinate.

5. Communication of Orders and instructions.

Type of communication

(1) Literal Communication

(2) Nonverbal Communication

Verbal Communication :- This communication is used to express thoughts and feelings to others by speech in verbal form and by words or signd in written form.

Verbal Communication can be again classified into two types of communication.

(A)Oral Communication

(B) Written communication

Verbal Communication :- In this, the expression of Ideas is done through dialogue, interpretation, discussion, group discussion, question answers and story written etc.

Written communication :- In order to improve the written massage, it is necessary that the written language should be simple, intelligible, clear and comprehensible, to that the receptor can accept it completely without any confusion.

Nonverbal communication :-

Language is not used in it. It includes voice signals, eye contact and use of face postures and tactile contacts etc.

Communication in the classroom:-

Communication is one of the most important medium that plays an important role in influencing teachers and students by keeping them together. Therefore we can say that the talk, discussions (between teacher and student) for the achievement of educational objectives will be called class communication.

Communication barriers :-

1. Physical barriers- noise, invisibility, environment and physical inconveniences, poor health, attention not being focused.

2. Language barriers - unclear words, unnecessary word. 3. Psychological barriers :-

anorexia, excessive thinking, unviable experiences.

Resolution of Communication :- (Resolving for effective communication)

(1) a s for as possible we should use simple, intelligible, comprehensible and clear language.

(2) A complete look at the elements that delay communication should be.

(3) should have good listening habits.

(4) Study the return messages correctly should do.

In this way, communication is the means of systematic operation of human society, dissemination of knowledge and progress.

J. Parte

I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
infosrf.com

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