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बालविकास एवं शिक्षाशास्त्र : वृद्धि और विकास में अन्तर(Balvikas : Vriddhi & Vikas me antar) Child Development and Pedagogy : Difference between Growth and Development

वृद्धि और विकास में अन्तर(Difference between growth and development) :-

विकास एवं वृद्धि शब्द का प्रयोग जन-सामान्य में प्रायः समानार्थक अर्थ में लिए जाते हैं किंतु संकल्पनात्मक रूप से दोनों में सूक्ष्म अंतर है। मनोवैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण अंतर बताएँ हैं।

The term development and growth are often used in a synonymous sense in the general public, but conceptually there is a subtle difference between the two. Psychologists have noted important differences.

सोरेनसन के अनुसार :– 'अभिवृद्धि' शब्द का प्रयोग सामान्यतः शरीर और उसके अंगों के भारत तथा आकार में वृद्धि के लिए किया जाता है। इस वृद्धि को नापा या तौला जा सकता है। विकास का संबंध अभिवृद्धि से अवश्य होता है किंतु यह शरीर के अंगों में होने वाले परिवर्तनों को विशेष रूप से व्यक्त करता है।

According to Sorenson: - The term 'accretion' is commonly used to increase the size and shape of the body and its parts in India. This growth can be measured or weighed. Growth is related to growth, but it specifically expresses changes in body parts.

अभिवृद्धि के संदर्भ में हरलाक के विचार (Thoughts of Harlak in terms of growth) :–

"विकास, अभिवृद्धि तक सीमित नहीं है, इसकी बजाय इसमें परिपक्वता की अवस्था के लक्ष्य की ओर परिवर्तनों का प्रगतिशील क्रम निहित रहता है। विकास के परिणाम स्वरूप व्यक्ति में नवीन विशेषताएँ एवं योग्यताएँ प्रकट होती हैं।"

"Development is not limited to accretion, instead it contains a progressive sequence of changes towards the goal of the state of maturity. As a result of development new characteristics and abilities are revealed in the individual."

वृद्धि, विवृद्धि या अभिवृद्धि तीनों समानार्थक शब्द है। जिसका अर्थ शारीरिक शिराओं, अवयवों एवं विभिन्न संस्थानों में बढ़ाव को प्राप्त करने से होता है एवं उनके आकार और परिमाण में परिवर्तन होने से है। शरीर में बढ़ाव होने से शरीर के आंतरिक एवं बाह्य अंगों के विकास से है। वैसे तो अभिवृद्धि का संबंध शारीरिक तथा मानसिक वृद्धि तथा वातावरण से संबंधित है। अभिवृद्धि किसी विशेष पक्ष या आंशिक स्वरूप को व्यक्त करती है। इस संबंध में यह उल्लेखनीय बात है कि अभिवृद्धि में बढ़ाव का प्रतिमान समान नहीं होता है। वृद्धि में व्यक्तिगत भेद पाए जाते हैं जबकि विकास में व्यक्तिगत भिन्नता होते हुए उनके चरण निश्चित क्रम में बटे होते हैं अर्थात विकास सभी बालकों में समान होता है किंतु उसकी दर में अंतर पाया जाता है। चूँकि विकास एवं अभिवृद्धि एक दूसरे के पूरक हैं या यूँ कहें अभिवृद्धि विकास का ही एक अंग है।

Growth, growth or growth are all three synonyms. Which means attaining physical veins, components and elongation in different institutions and changes in their size and magnitude. The increase in the body is due to the development of internal and external organs of the body. As such, the relation of growth is related to physical and mental growth and environment. Addition expresses a particular aspect or partial nature. It is noteworthy in this regard that the pattern of elongation in accretion is not the same. Individual differences are found in growth, while their stages are divided in a certain order, with individual differences in growth, that is, growth is the same in all children, but there is a difference in its rate. Since development and growth are complementary to each other, or rather growth is a part of development.

प्रायः यह देखने में भी मिलता है कि बालक की शारीरिक वृद्धि को अनुपात में उसकी कार्यकुशलता में प्रगति होती नहीं होती है। ऐसी स्थिति में कहा जा सकता है कि बालक में वृद्धि तो हुई है किंतु उसका विकास नहीं हो पाया है।
जैसा कि सोरेनसन मानते हैं कि वृद्धि को मापा जा सकता है कि तो विकास व्यक्ति की क्रियाओं में निरंतर होने वाले परिवर्तनों में परिलक्षित होता है। अतएव मनोवैज्ञानिक अर्थों में विकास केवल शारीरिक आकार और अंगों में परिवर्तन होना नहीं है, यह नई नई विशेषताओं और क्षमताओं का विकसित होना है जो गर्भावस्था से आरंभ होकर परिपक्वता तक चलता है।

It is also often seen that the physical progress of the child does not progress in proportion. In such a situation it can be said that the child has grown but it has not been developed.
As Sorenson assumes that growth can be measured, then growth is reflected in changes occurring continuously in a person's actions. Therefore, development in the psychological sense is not just the change in body size and organs, it is the development of new characteristics and abilities that start from pregnancy to maturity.

वृद्धि और विकास में प्रमुख अंतर निम्न बिंदुओं के आधार पर है (The major differences in growth and development are based on the following points) –

(1) स्वरूप :– वृद्धि - वृद्धि का स्वरूप बाह्य होता है।
विकास - विकास का स्वरूप आंतरिक होता है।

(2) निरंतरता :– वृद्धि - वृद्धि में निरंतरता केवल परिपक्वता की स्थिति तक रहती है।
विकास - विकास जीवन पर्यंत चलता रहता है कहीं अवरोध नहीं आता।

(3) क्रम :– वृद्धि - वृद्धि में कोई निश्चित क्रम नहीं होता।
विकास - विकास का क्रम निश्चित होता है।

(4) दिशा :– वृद्धि - वृद्धि दिशाहीन होती है। विकास - विकास की एक निश्चित दिशा होती है।

(5) लक्ष्य :– वृद्धि - वृद्धि का कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं रहता।
विकास - विकास का लक्ष्य निर्धारित रहता है।

(6) मापन :– वृद्धि - वृद्धि का मापन प्रत्यक्ष रुप से किया जा सकता है।
विकास - विकास का मापन प्रत्यक्ष रूप से संभव नहीं है, मनोवैज्ञानिक विधियों से मापन संभव हो पाता है।

(7) क्षेत्र :- वृद्धि - वृद्धि का क्षेत्र एवं इसका उपयोग संकुचित अर्थों में किया जाता है यह विकास की प्रक्रिया का एक चरण होता है।
विकास - विकास का क्षेत्र व्यापक एवं विस्तृत अर्थों में किया जाता है वृद्धि इसका एकमात्र भाग है।

(8) प्रयोग :– वृद्धि - वृद्धि शब्द का प्रयोग केवल परिमाणात्मक परिवर्तनों जैसे- आकार, लंबाई, ऊँचाई आदि के लिए होता है।
विकास - विकास शब्द का प्रयोग परिमाणात्मक परिवर्तनों के साथ साथ व्यावहारिक परिवर्तनों जैसे- कार्यकुशलता, कार्यक्षमता, व्यवहार आदि के लिए होता है।

(9) अनिवार्यता :- वृद्धि - बालक की शारीरिक वृद्धि हो रही है इसका अर्थ यह नहीं होता कि बालक का विकास भी हो रहा है।
विकास - बालक में विकास के लिए वृद्धि आवश्यक नहीं है जैसे- बौने व्यक्ति का भी विकास होता है।

(10) प्रभाव :- वृद्धि - वृद्धि पर वातावरणीय तत्वों का खासा प्रभाव पड़ता है।
विकास - विकास में वातावरणीय तत्वों के अलावा पितृ-सूत्रों की रचना, वंशानुक्रम का प्रभाव भी रहता है।

(11) व्यापकता :– वृद्धि - वृद्धि किसी विशेष पक्ष या मात्र स्वरूप को व्यक्त करती है।
विकास - विकास प्राणी में होने वाले कुल परिवर्तनों का योग होता है।

(1) Format: - Growth - Growth is external.
Development - The nature of development is internal.

(2) Continuity: - Growth - Continuity in growth only lasts until maturity.
Development - Development continues throughout life, there is no barrier.

(3) Sequence: - Increment - There is no fixed order in increment.
Development - The sequence of development is fixed.

(4) Direction: - Growth - Growth is directionless. Development - There is a definite direction of development.

(5) Goal: - Growth - No target of growth remains fixed.
Development - The goal of development remains fixed.

(6) Measurement: - Growth - Growth can be measured directly.
Development - Measurement of development is not directly possible, measurement is possible through psychological methods.

(7) Area: - Growth - The area of ​​growth and its use in the narrow sense is the process of development. There is a phase of.
Development - The area of ​​development is done in a broad and wide sense. Growth is the only part of it.

(8) Usage: - growth - The use of the word growth only for quantitative changes such as size, length, height, etc. Happens to be.
Development - The term development is used for quantitative changes as well as practical changes such as efficiency, efficiency, behavior, etc.

(9) Essentials: - Growth - The physical growth of the child is not that it does not mean that the development of the child Is also happening.
Development - Growth is not necessary for the development of a child, just as a dwarf also develops.

(10) Impact: - Growth - Environmental elements have a significant impact on growth.
Development - In addition to the environmental elements in development, the composition of ancestral formulas, there is also the effect of inheritance.

(11) generality: - growth - growth expresses a particular aspect or mere nature.
Development - Development is the sum of the total changes that occur in a living being.

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