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CTET एवं TET में PRT हेतु पर्यावरण की अवधारणा (पर्यावरण अध्ययन)
Concept of Environment for PRT in CTET and TET (Environmental Studies)

◆ पर्यावरण शिक्षा अपने आसपास के परिवेश की शिक्षा है। पर्यावरण शब्द दो शब्दों से बना है- 'परि+आवरण' अर्थात हमारे चारों ओर का आवरण (वातावरण)। मानव का जीवन अपने आसपास के पर्यावरण पर निर्भर है। आज के युग में पर्यावरणीय हास के परिणाम स्वरूप जीवन के आधार- 'प्राकृतिक स्त्रोत' संकट में हैं। इस प्रकार पृथ्वी पर जीव तथा उत्पाद दोनों का अस्तित्व संकट में है। पर्यावरण शिक्षा एक ऐसा उपाय है, जिसमें मानव पृथ्वी का जीवन रहने के अवसरों की निरंतरता बनाए रख सकता है। पर्यावरण की चिंता तथा चिन्तन में छात्रों को जागरुक करना आवश्यक है।

(Environmental education is the education of its surroundings. The word Paryavaran is made up of two words - 'Peri + Aavran' i.e. the covering (environment) around us. Human life depends on the environment around him. In today's era, as a result of environmental degradation, the basis of life - 'natural sources' are in crisis. Thus the existence of both organism and product on the earth is in crisis. Environmental education is one of the ways in which humans can maintain continuity of opportunities to live life on Earth. It is necessary to make students aware of the concern and concern about the environment.)

पर्यावरण की परिभाषाएँ:-
(Definition of environment)

पर्यावरण शिक्षा वास्तव में पर्यावरण की मूल अवधारणाओं को जानने, समझने तथा व्यवहार में अपनाने की प्रक्रिया है इसमें पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति सकारात्मक प्रयास महत्वपूर्ण हैं।
» सेम्पल के अनुसार- "मानव पृथ्वी तल की उपज है।"

» अनास्टैसी के अनुसार- "व्यक्ति के वंशानुक्रम के अतिरिक्त वह सब कुछ पर्यावरण है जो उसे प्रभावित करता है।"

(Environmental education is actually a process of learning, understanding and adopting the basic concepts of the environment, in which positive efforts towards environmental problems are important.

»According to the Sample-" Human earth is the product of the plane ".

»According to Anastasi-" Everything except the person's inheritance is the environment which affects him.")

◆ पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता :-
(Need for environmental education)

» पृथ्वी का प्रत्येक देश- प्रदेश किसी न किसी प्रकार के पर्यावरण संकट से जूझ रहा है। सभी विकासशील एवं विकसित देश जनसंख्या वृद्धि के दुष्प्रभाव, प्रदूषण, प्रकृति से छेड़-छाड़ से उत्पन्न विकृतियों एवं असंतुलन का सामना कर रहे हैं। मानव द्वारा औद्योगिकीरण की तेज रफ्तार से पर्यावरण असंतुलन तथा प्रदूषण संकट के साथ तीव्रता से रिक्त होते ऊर्जा भंडार, भूजलस्तर, पृथ्वी तल का बढ़ता तापमान, अपशिष्ट कचरे का भंडार आदि विकराल समस्या बनते जा रहे हैं। जल एवं वायु जीवन के भौतिक आधार हैं इनमें बढ़ते प्रदूषण से मानव स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता में निरंतर कमी आ रही है।

(Every country and region of the earth is facing some kind of environmental crisis. All developing and developed countries are facing the distortions and imbalances arising from the ill effects of population growth, pollution, manipulation of nature. With the rapid pace of industrialization by human beings, environmental imbalance and pollution crisis are rapidly evacuating energy reserves, groundwater levels, rising temperature of the earth floor, waste waste reserves, etc. are becoming huge problems. Water and air are the physical basis of life. Due to increasing pollution, human health, quality of life is constantly decreasing.)

» उपर्युक्त पर्यावरणीय संकट- प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों की कमी, जनसंख्या विस्फोटक से घटती जीवन की गुणवत्ता आदि समस्याओं का समाधान किसी नियम, अधिनियम से संभव नहीं है। पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान में सकारात्मक चिंतन तथा सकारात्मक व्यवहार ही एक-मात्र विकल्प है जो जागरूकता, जानना-समझना, दृष्टिकोण में परिवर्तन तथा व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन से ही संभव है। (The above environmental crisis - pollution, lack of natural resources, population deteriorating explosive quality of life etc. is not possible with any rules, act. Positive thinking and positive behavior is the only option in solving environmental problems which is possible only through awareness, knowing-understanding, change in attitude and positive change in behavior. इस प्रकार का प्रथम चरण जागरूकता है। पर्यावरण के विभिन्न घटकों को जानना, समझना तथा संरक्षण के प्रति सकारात्मक व्यवहार करने का प्रयास ही पर्यावरण शिक्षा है।

This type of first phase is awareness. Environmental education is the only attempt to know, understand and understand the various components of the environment.)

» पर्यावरण प्राथमिक स्तर पर जानकारी तथा ज्ञान देने का सशक्त माध्यम भी है इससे बच्चे अपने जाने-पहचाने पर्यावरण के माध्यम से सरलता, सहजता से सीखता है तथा प्रकृति के साथ उसका भावनात्मक लगाव भी हो जाता है। ये बच्चे भविष्य में प्रकृति के विनाश के प्रति सचेत अवश्य रहेंगे।

(Environment is also a powerful medium for imparting information and knowledge at primary level, through which the child learns through his well-known environment easily, easily and his emotional attachment with nature. These children must be conscious of the destruction of nature in future.)

» प्रारंभिक शिक्षा काल वास्तव में बच्चों का समग्र विकास का काल होता है अतः इस काल में बच्चा जो प्राथमिक स्तर पर सीखता है वह अपने जीवन पयंत तक याद रखता है।

(Elementary education period is actually the period of overall development of children, so in this period the child who learns at primary level remembers till his life.)

» माध्यमिक स्तर पर पर्यावरणीय शिक्षा बच्चों को अपने प्राकृतिक, जैविक तथा सामाजिक परिवेश से जोड़ती है। गुणवत्तापूर्वक जीवन के लिए प्रकृति का प्रत्येक घटक अनिवार्य है तथा परस्पर एक-दूसरे पर निर्भर हैं। इससे सीखकर बच्चे इस स्तर पर प्राप्त करते हैं।

(At secondary level, environmental education connects children with their natural, biological and social environment. Every component of nature is essential for a quality life and are interdependent. Children get to this level by learning from it.)

» उच्च स्तर के छात्रों में प्रकृति संरक्षण की समझ को तथा संरक्षण हेतु सक्रिय प्रयास को प्रेरित करने का प्रयास करना आवश्यक होता है।

(It is necessary to try to inspire the understanding of nature conservation in high level students and active efforts for conservation.)

» पर्यावरण शिक्षा विश्व समुदाय को पर्यावरणीय संबंधी दी जाने वाली वह शिक्षा है जिससे वे समस्याओं से अवगत होकर उसका हल खोज सके तथा भविष्य में आने वाली समस्याओं को रोक सकें।

(Environmental education is an environmental education given to the world community so that they can become aware of problems and find solutions and prevent future problems.)

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