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समाजीकरण का अर्थ- शिक्षक चयन परीक्षापयोगी जानकारी ~

Meaning of Socialization ~ Teacher Selection Exam Useful Information

समाजीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा मानव को सामाजिक- सांस्कृतिक संसार से न सिर्फ परिचित कराया जाता है बल्कि एक पीढी से दूसरी पीढी तक हस्तांतरित भी किया जाता है।प्रमुख समाज-शास्त्रियों के अनुसार इसकी अवधारणा का प्रयोग दो अर्थों मे किया जाता है- एक अर्थ में बच्चों द्वारा की जाने वाली- 'सामाजिक अनुकूलन की प्रक्रिया' से है तथा दूसरे अर्थ में 'संस्कृति की सीख' को महत्वपूर्ण माना है।

Socialization is a process by which humans are not only acquainted with the socio-cultural world but also transferred from one generation to the next. According to prominent sociologist the concept is used in two ways, in one sense, is from the 'Process of Social Adaptation'- practiced by the children, and in the other sense, the 'Learning of Culture' is considered important.

◆ समाजीकरण की विशेषताएँ-

(Characteristics of socialization)

(1) समाजीकरण सीखने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।

Socialization is an important learning process.

(2) यह जन्म से मृत्यु तक चलने वाली एक निरंतर प्रक्रिया है।

It is a continuous process lasting from birth to death.

(3) इससे समाजिक परिवेश से अनुकूलन तथा व्यकितत्व को विकसित करने की क्षमता प्रदान की जाती है।

It provides the ability to adapt to the social environment and develop personality.

(4) यह संस्कृति को आत्मसात करने की प्रक्रिया है।

It is the process of assimilating culture.

(5) यह समाज की प्रकार्यात्मक सदस्य बनने की प्रक्रिया है।

It is the process of becoming a functional member of society.

◆ समाजीकरण के स्तर या अवस्थाएँ-

(Stages of Socialization)

यह जीवनपर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है।इसमें व्यक्ति बढती उम्र के साथ वह अनेक परिस्थितियों से होकर गुजरता है। बढती उम्र के साथ व्यक्ति में न सिर्फ शारीरिक परिपक्वता आती है अपितु समाजीकरण की प्रकृति मे भी बदलाव होते हैं।जीवन के प्रारंभिक वर्षों में समाजीकरण के द्वारा मनुष्य का जो संवेगात्मक विकास होता है, वही आगामी समाजीकरण मे उसका आधार बन जाता है।

It is a lifelong process. In this, as a person grows old, he goes through many situations. With increasing age not only physical maturity comes in a person, but there are also changes in the nature of socialization. The emotional development of human beings through socialization in the initial years of life, it becomes the basis of the next socialization.

◆ समाजीकरण के प्रमुख स्तर -

(Stages of Socialization)

(1) मौखिक स्तर (Oral Level)-

इस अवस्था में बच्चे अपनी संवेदनाओं को, परेशानियों को रोकर, चिल्लाकर, हँसकर, मुस्कुराकर यानी मुख के माध्यम से व्यक्त करते हैं, क्योंकि इस अवस्था में भाषा का अभाव होता है।

In this stage children express their sensation through crying, laughing, smiling because language is laking in this stage.

(2) शैस्वावस्था (Infancy)-

यह प्रथम अवस्था का विकसित रूप है। इस स्तर मे माँ बच्चों को दिनचर्या के कार्यों का प्रशिक्षण देने का प्रयास करती है एवं आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश करती है। इस अवस्था में बोलना, चलना, सफाई आदि की शिक्षा दी जाती है।

It is a developed form of the first stage. In this stage the mother tries to train the children in routine tasks and tries to make them self-depended. In this state speaking, walking, cleaning etc. are taught.

(3) बाल्यावस्था ( Childhood)-

इस अवस्था मे बच्चा अपने परिवार के सदस्यों की भूमिका समझने लगता है और उसी के अनुरूप व्यवहार भी करने लगता है। यह एक तरह से परिवार के साथ सामंजस्य बिठाने की अवस्था है।

At this stage the child begins to understand the role of his family members and also behaves accordingly. It is a way of reconciling with the family.

(4) किशोरावस्था (Adolescence)-

इस अवस्था में बच्चों में स्वतंत्रता की चाहत प्रबल होती है। वे अपने माँ-बाप के बंदिशों से मुक्त होना चाहते हैं। बच्चों में शारीरिक परिवर्तन देखे जा सकते हैं।

In this stage, the desire of freedom prevails in children. They want to be free from the restrictions of their parents. Physical changes can be seen in children.

◆ समाजीकरण की प्रक्रिया मे अभिभावक की भूमिका-

(Role of parents in process of socialization)

(1) वर्ग भिन्नता (class differences)

छात्रों के समाजीकरण पर उनके परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का अत्यधिक गहरा प्रभाव पड़ता है। निम्न वर्गों के माता -पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे अपनों से बड़ों के प्रति आज्ञाकारी बनें, किंतु मध्यम वर्ग के माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे अपने विवेक तथा नैतिकता के आधार पर आज्ञाकारी बनें। निम्न वर्ग की तुलना में मध्यम वर्ग के परिवार अपने बच्चों में आकांक्षा का स्तर ऊँचा बनाने का प्रयास करते हैं।

Class differences have a profound effect on the socialization of students and their family's socio-economic status. Parents of the lower classes want their children to be obedient to their elders but middle-class parents want their children to be obedient on the basis of their conscience and morality. Middle class families try to raise the level of espiration in their children higher than the lower class.

(2) पारिवारिक अंतर्क्रिया

(Family Interactions)

यदि बालकों के प्रति माता-पिता तथा अन्य लोगों का व्यवहार स्नेहात्मक नहीं है, उन्हें कठोर या दूषित अनुशासन में रखा जाता है तो इसका उनके व्यक्तित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा अवांछित विशेषताएँ विकसित होने लगती हैं।अतः उनसें मित्रवत व्यवहार करके उनमें आत्मविश्वास पैदा करना चाहिए।

If the behaviour of parents and other people towards children is not affectionate, they are kept in harsh or corrupt discipline then it adversely affects their personality and unwanted characteristics begin to develop. Therefore, by treating them friendly, you should instill confidence in them.

(3) पारिवारिक संरचना

(Family Composition)

इसका भी काफी गहरा एवं व्यापक प्रभाव पड़ता है। छोटे परिवारों के बालकों मे सामाजिक परिपक्वता शीघ्रता से एवं बडे़ परिवार के बालकों मे सामाजिक परिपक्वता विलंब से होती है।इसका प्रमुख कारण यह है कि छोटे परिवारों में बालकों को अपने माता-पिता तथा अन्य वरिष्ठ सदस्यों के साथ अंतर्क्रिया तथा प्रशिक्षण का अवसर अधिकाधिक प्राप्त होता है।

It also has a deep and wide impact. Social maturity occurs quickly in children of small families and late social maturity in children of large families. The main reason for this is that children in small families get more and more opportunities for interaction and training with their parents and other senior members.

(4) जन्म क्रम (Birth Order)-

इस प्रक्रिया मे पहली संतान मे मानसिक विकास शीघ्रता से किन्तु शारीरक एवं अन्य विकास अपेक्षाकृत विलंब से होता है। इसका प्रमुख कारण है कि बाद मे जन्मे बालकों को अनुकरण का अवसर अधिक मिलता है।

In this process, mental development takes place quickly in the first child but relatively late in physical and other development. The main reason for this is that later born children get more opportunity to emulate.

◆ समाजीकरण की प्रक्रिया में मित्रों की भूमिका (Role of Peers in process of socialization)

बालकों के समाजीकरण में उनके साथियों का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। वे अपने आपसी संपर्क से विभिन्न प्रकार के व्यवहार को ग्रहण करते हैं। ऐसे व्यवहार उनके समाजीकरण में मुख्य भूमिका निभाते हैं। मित्रों का चयन बालक अपनी इच्छानुसार करता है, एवं उनके आचरण तथा विचार उसके समाजीकरण की दिशा तथा स्वरूप निर्धारित करते हैं।

Their peers also contribute significantly to the socialization of children. They adapt different types of behaviour from their mutual contact. Such behaviour play a major role in their socialization. The child selects his friends according to his wish, and his conduct and thoughts determine the direction and form of his socialization.

◆ समाजीकरण की प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका

(Role of Teachers in process of socialization)

बालकों के समाजीकरण की प्रक्रिया मे परिवार के बाद विद्यालय और विद्यालय में विशेष रूप से शिक्षक आते हैं। हर एक समाज के कुछ विश्वास, दृष्टिकोण, मान्यताएँ, परंपराएँ होती हैं, जिनको 'संस्कृति' के नाम से जाना जाता है। संस्कृति एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित की जाती है और सामाजिक लोगों के आचरण को प्रभावित करती है। शिक्षक का सर्वश्रेष्ठ कार्य है, इस संस्कृति को बालकों में स्थापित करना। शिक्षक, माता-पिता के साथ बालक के चरित्र और व्यकतित्व का विकास करने में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस प्रकार यह अति आवश्यक है कि शिक्षक और माता-पिता एक दूसरे के घनिष्ठ संपर्क में रहें एवं एक ही प्रकार के विश्वासों और दृष्टिकोणों को अपनाकर बालक का सही दिशा में समाजीकरण करें।

In the process of socialization of children, after school, specially teachers come to school and school every society has certain belief, attitude, values, tradition which are known as 'culture'. Culture is transferred from one generation to another and affect the conduct of people. The best job of a teacher is to establish this culture among children. The teacher plays an important role in developing the character and personality of the child along with the parents. Thus it is very important that teachers and parents stay in close contact with each other and socialize the child in the right direction by adapting the same belief and attitudes.

निष्कर्षतः हम कह सकते हैं कि शिक्षक बालक के समाजीकरण को प्रभावित करते हैं। शिक्षक के स्नेह, पक्षपात, बुरे व्यवहार, दंड आदि का सभी बच्चों पर कुछ न कुछ प्रभाव पड़ता है एवं बालक का सामाजिक विकास उत्तम अथवा विकृत हो जाता है। यदि शिक्षक छोटी छोटी बातों पर बालकों को दंड देता है, तब उनके यानी बालकों के समाजीकरण में संकीर्णता आ जाती है। यदि शिक्षक अपने छात्रों के प्रति सहानुभूति का भाव रखता है, तब छात्रों का समाजीकरण सामान्य रूप से होता है। अतः हम यह कह सकते हैं कि विद्यार्थियों के समाजीकरण की प्रक्रिया में शिक्षकों की अहम् एवं महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

In conclusion we can say that teachers affect the socialization of a child. The teacher's affection partiality, bad behaviour, punishment etc. have some effects on all the children and the social development of the child is good or distorted. If the teacher furnishes the children on small matter then there is a a narrowness in the socialization of the children. If the teacher is sympathetic towards his/her students, then socialization of students takes place normally. Therefore we can say that teachers had an important role in the process of socialization of students.

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