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चैप्टर 1 'चलो चलें स्कूल' पाठ में आई प्रमुख अवधारणाएँ एवं अभ्यास || Chapter 1 'Chalo Chale School' - Exercise


चैप्टर 1 'चलो चलें स्कूल' पाठ में आई प्रमुख अवधारणाएँ एवं अभ्यास || Chapter 1 'Chalo Chale School' - Exercise

उप शीर्षक:
Class 4th की पर्यावरण अध्ययन (आस-पास) के पाठ 1 'चलो चलें स्कूल' पाठ में आई प्रमुख अवधारणाएँ एवं अभ्यास हेतु प्रश्न।

असम में बाँस के पुल - हमारे देश का असम राज्य जहाँ बहुत अधिक बारिश होती है जिससे चारों तरफ पानी भर जाता है। इस क्षेत्र में बच्चे अपने स्कूल तक पहुँचने के लिए बाँस से बने पुल का सहारा लेते हैं। स्कूल में बच्चे एक हाथ से बाँस को पकड़ते हैं और सावधानीपूर्वक आगे बढ़ते हैं।

लद्दाख - लद्दाख एक और असमतल भूमि वाला क्षेत्र है जहाँ कई स्थानों पर चौड़ी एवं गहरी नदियाँ हैं। यह क्षेत्र पहाड़ी एवं घाटियों वाला है। साथ ही कई क्षेत्रों में बर्फ भी जमीन होती है। यहाँ पर बच्चों को अपने विद्यालय तक पहुँचने के लिए ट्राली का सहारा लेना पड़ता है। ट्राली लकड़ी से बना हुआ एक का झूला होता है जो कि पुली की मदद से लोहे की रस्सी पर लटका हुआ होता है। इस ट्राली में 4 से 5 बच्चे एक साथ नदी के पार अपने विद्यालय तक पहुँच जाते हैं।

पुली से कार्य आसान - पुली जिसे की घिरनी भी कहा जाता है से संबंधित प्रश्न देखें-
प्रश्न 1 - पुली किस तरह हमारे कार्य को आसान बनाती है? दैनिक जीवन में इसके उदाहरण बताइए।
उत्तर - पुली इसे घिरनी भी कहा जाता है इससे कार्य करने में कम बल (ताकत) लगता है। पुली (घिरनी) से खींचने या सरकाने का कार्य एकाएक (एक साथ) नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे होता है, जिससे काम आसान हो जाता है। हमारे दैनिक जीवन में-
(1) कुओं पर पानी खींचने।
(2) घर की ऊपरी मंजिल पर सामान चढ़ाने।
(3) ट्रालियों में एक स्थान से दूसरे स्थान जाने।
(4) रेडियो में मीटर को चलाने।
(5) बिजली के ट्रांसफार्मर को ऊपर लगाने आदि में पुली का उपयोग होता है।

प्रश्न 2 - सीमेंट के पुल कहाँ पर बनाए जाते हैं?
उत्तर - सीमेंट से पुल मैदानी व पठारी क्षेत्रों में नदियों और नहरों पर बनाए जाते हैं।

प्रश्न 3 - बाँस से बने और सीमेंट के बने पुल में अंतर बताओ।
उत्तर -

बाँस से बना पुल सीमेंट से बना पुल
बाँस का पुल बाँस के खंभों के सहारे बनाये जाते हैं। सीमेंट के पुल सीमेंट व लोहे के पिलर पर बनाए जाते हैं।
बाँस के पुल बहुत सकरे होते हैं। सीमेंट के पुल चौड़े होते हैं।
बाँस के पुल कमजोर होते हैं। सीमेंट के पुल मजबूत होते हैं।
बाँस के पुल से एक ही व्यक्ति एक बार में गुजर सकता है। सीमेंट के पुल से एक साथ कई व्यक्ति गुजर सकते हैं।
बाँस के फूलों में पकड़ने के लिए ऊपर बाँस लगाए जाते हैं। सीमेंट के पुलों में दोनों और रेलिंग लगाई जाती है।
बाँस के पुल सीधे-सीधे होते हैं। कुछ सीमेंट के पुल मेहराबदार बनाए जाते हैं।

प्रश्न 4 - अगर आपको मौका मिले तो तुम कौन से फूल से जाना चाहोगे? क्यों?
उत्तर - यदि हमें मौका मिले तो हम सीमेंट के पुल से जाना चाहेंगे। क्योंकि सीमेंट का पुल चौड़ा और सुरक्षित होता है। जबकि अन्य पुल ज्यादा सुरक्षित नहीं होते।

प्रश्न 5 - अपने आसपास किसी पुल या पुलिया को देखो और उसके बारे में कुछ बातें पता करो-
(i) वह कहाँ बना है - पानी पर, सड़क पर, पहाड़ों के बीच या कहीं और?
उत्तर - हमने जो पुलिया देखा है वह नहर पर बना हुआ है।
(ii) पुल को कौन-कौन पार करता है? लोग ही जाते हैं या जानवर और गाड़ियाँ भी?
उत्तर - पुल के ऊपर से बहुत सारे लोग, गाड़ियाँ और गाय, बैल, बकरी जैसे जानवर नहर पार करते हैं।
(iii) क्या वह पुल पुराना-सा लगता है या नया?
उत्तर - यह पुल नया लगता है।
(iv) पता करो कि वह पुल किन-किन चीजों से बना है? उन चीज़ों की सूची बनाओ।
उत्तर - पुल सीमेंट, रेत, क्रांक्रीट और लोहा से बना है।
(v) सोचो, अगर वह पुल नहीं होता, तो क्या-क्या परेशानियाँ होतीं? कुछ अन्य तरीके देखें, जिनसे बच्चे स्कूल पहुँचते हैं।
उत्तर - यदि पुल नहीं होता तो रास्ते में आने वाले नदी-नालों, घाटियों को पार करना मुश्किल हो जाता। पहाड़ी इलाकों में कुछ बच्चे पेड़ों, लताओं के सहारे रास्ते पर गुजरते हुए उन्हें स्कूल तक पहुँचते हैं।

प्रश्न 6 - वल्लम क्या है? इसका उपयोग कहाँ होता है?
उत्तर - वल्लम एक प्रकार की छोटी लम्बी नाव होती है, जो कि केरल प्रान्त में पानी को पार करने के लिए प्रयोग की जाती है। वल्लम (लकड़ी से बनी छोटी सी नाव) से केरल के बच्चे इसमें बैठकर स्कूल तक जाते हैं।

ऊँट गाड़ी एवं बैलगाड़ी - हमारे देश में ऐसे प्रान्त हैं जहाँ ऊँटगाड़ी और बैलगाड़ी का प्रयोग किया जाता है। राजस्थान प्रान्त मरुस्थली इलाका है। वहाँ पर रेत की अधिकता होने के कारण ऊँटगाड़ी का प्रयोग किया जाता है। क्योंकि ऊँट के पैर इस तरह बने होते हैं कि रेत में नहीं धसते और ऊँट आसानी से चल सकता है।
मैदानी इलाकों में बैलगाड़ी का प्रयोग किया जाता है क्योंकि इस क्षेत्र में ज्यादा उबड़-खाबड़ या ज्यादा ढलान वाले क्षेत्र नहीं हैं।

प्रश्न 7 - राजस्थान में बच्चे स्कूल पहुँचने के लिए ऊँटगाड़ी का प्रयोग क्यों करते हैं?
उत्तर - राजस्थान प्रान्त मरुस्थली इलाका है, जहाँ पर रेत बहुतायत मात्रा में पाई जाती है। यहाँ पर अन्य जानवरों जैसे बैल, घोड़ा आदि का चलना दूभर हो जाता है। जबकि ऊँट के पैर गद्देदार होते हैं साथ ही इसके शरीर की रचना इस तरह होती है कि यह बिना भोजन-पानी के कई दिनों तक ऐसे इलाकों में रह सकता है। इसलिए यहाँ बच्चे विद्यालय जाने के लिए ऊँट गाड़ी का प्रयोग किया जाता हैं।

बैलगाड़ी की बनावट - बैलगाड़ी बैलों के द्वारा खींची जाने वाली दो पहियों का एक वाहन होता है। इस गाड़ी के दोनों साइड दो बैलों को फाँद दिया जाता है। हॉकर बैलों के रस्सों को हाथ में पकड़ कर गाड़ी में बैठ जाता है। गाड़ी को दाएँ बाएँ मोड़ने के लिए एक बैल का रस्से खींचा और दूसरे बैल का रस्से को ढीला कर चलाया जाता है जिससे गाड़ी दाएँ बाएँ मुड़ सकती है। साथ ही गाड़ी चलाने वाला अपनी टिटकार से बैलों को चलाता है।
हमारे क्षेत्र में कुछ बैल गाड़ियाँ जो सामान ढोने के काम में आती हैं, उनमें छत नहीं होती। किंतु कुछ ऐसी बैल गाड़ियाँ होती हैं जो यात्रा करने के काम में आती हैं, उनमें छत बनाई जाती है। यह छत बाँस की चटाई की बनी होती है, जिस पर कपड़े को चढ़ाकर सिल दिया जाता है। गाड़ी के पहिए लकड़ी के बने होते हैं, जिन्हें कारीगर नाप-झोंक कर सावधानीपूर्वक तैयार करता है।

प्रश्न 8 - जंगली रास्तों से अपने विद्यालय जाते समय विद्यार्थियों को कैसा महसूस होता होगा?
उत्तर - जंगली रास्तों से जिन विद्यार्थियों को अपने विद्यालय तक जाना पड़ता है उन्हें रास्ते में उबड़-खाबड़ रास्ते पर चलना पड़ता होगा। कहीं-कहीं जंगल बहुत घना होता है जहाँ दिन में भी रात के सामान लगता होगा। जंगल के सन्नाटे में कई तरह के पक्षियों एवं जानवरों की आवाजें सुनाई देती होंगी। हो सकता है विद्यार्थियों को कभी-कभी डर भी लगता होगा।

प्रश्न 9 - जंगल से गुजरते समय विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षियों की आवाजें सुनाई देती हैं। आप अपने आस-पास पाए जाने वाले किन-किन पशु पक्षियों की आवाजों को पहचानते हो? वे किस तरह बोलते हैं लिखो।
उत्तर - हम अपने आस-पास पाए जाने वाले इन पशु-पक्षियों की आवाजों को पहचानते हैं-
पशु-पक्षी - उनकी आवाज
गाय/बैल - अम्भा (रम्भाना)
बकरी - में-में (मिमियाना)
भैंस -ओं.... (डकारना)
बन्दर - खों-खों (खिखियाना)
कुत्ता - भौं-भौ (भौंकना)
बिल्ली - म्याऊँ
गदहा - पों-पों
कौआ - काँव - काँव
तोता - टें - टें
मुर्गी - कोंक-कोंक
मुर्गा - कुकडूकूँ
कोयल - कुहू-कुहू
गौरैया - चीं-चीं

प्रश्न 10 - दूसरे गाँव में स्थित विद्यालय तक साइकिल से लड़कियाँ झुंड में क्यों जाती हैं?
उत्तर - अपनी आगे की पढ़ाई के लिए लड़कियाँ बड़े विद्यालयों में साइकिल से जाती हैं। वे अक्सर सात से आठ लड़कियों की टोली बनाकर जाती हैं। इससे वे सुरक्षित महसूस करती हैं साथ ही मुश्किल रास्तों को आसानी से पार किया जा सकता है।

प्रश्न 11 - बर्फ किन क्षेत्रों में जमती है, और यहाँ के बच्चे किस तरह स्कूल पहुँचते हैं?
उत्तर - बर्फ ऊँचे पहाड़ी इलाकों में जमती है। यहाँ बर्फ कई किलोमीटर दूर तक जमी होती है। इन क्षेत्रों में बच्चे एक-दूसरे का हाथ पकड़कर बर्फ पर पैर जमाते हुए ध्यान से चलकर अपने विद्यालय तक पहुँचते हैं। कभी-कभी बर्फ ताजी होने के कारण पैर धँस जाते हैं या कभी-कभी बच्चे फिसल भी जाते हैं।

प्रश्न 12 - उत्तराखंड का क्षेत्र कैसा है और यहाँ बच्चे किस तरह विद्यालय पहुँचते हैं?
उत्तर - उत्तराखण्ड एक पहाड़ी इलाका है। यहाँ कुछ स्थानों पर बर्फ जमी होती है तो कुछ इलाका पथरीला उबड़ खाबड़ होता है। यहाँ पर बच्चों को स्कूल तक पहुँचने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वे पैर जमा जमा कर आगे बढ़ते हैं।

बताओ

(i) क्या तुम्हारे स्कूल में भी सजा मिलती है? किस तरह की सजा मिलती है?
उत्तर - (उक्त प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी अपने अनुसार दे सकते हैं जैसे-)
हाँ कभी-कभी हमारे स्कूल में भी सजा मिलती है। हमें पाँच बैठक-उठक लगाने की सजा मिलती है।
(ii) तुम क्या सोचते हो स्कूल में सजा होनी चाहिए? यदि तुम्हारा ऐसी किसी घटना से सामना हो तो तुम किसे बताओगे?
उत्तर - नहीं हम ऐसा नहीं सोचते कि विद्यालय में सजा होनी चाहिए।
(टीप - विद्यार्थीगण सजा से संबंधित किसी घटना का विवरण दे सकते हैं।)
सजा मिलने की बात पालक शिक्षक संघ के अध्यक्ष को बताएंगे।
(iii) कैसे शिकायत दर्ज करोगे?
उत्तर - हम मौखिक रूप से ही शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
(iv) क्या सजा देना गलत काम के सुधार का तरीका है? स्कूल के लिए ऐसे नियम बनाओ जिनसे बिना सजा के स्कूल में सुधार हो?
उत्तर - नहीं, सजा देना गलत काम के सुधार का सही तरीका नहीं है।
स्कूल में अनुशासन के लिए ऐसे नियम हम बनाएंगे-
(1) सभी बच्चे एक साथ बैठकर तय करेंगे कि 10:30 से पहले विद्यालय आ जाएँ।
(2) गलत क्रियाकलाप के भावी परिणामों पर जानकारी देने के लिए बोर्ड पर जानकारी लिखकर टागेंगे।
(3) अच्छी पढ़ाई लिखाई करने से भविष्य कैसा सुनहरा बनता है। प्रति सप्ताह बाल सभा में इस बारे में चर्चा करेंगे।
(4) प्रति दिवस सभी बच्चे गुरुजी को विद्यालय आकर प्रणाम करेंगे।
(5) प्रत्येक कालखंड समय पर लगे ऐसी व्यवस्था बनाएंगे।
(6) विभिन्न प्रकार के खेलों का आयोजन विद्यालय में करेंगे।
(टीप- विद्यार्थीगण अपने अनुसार नियमों को तैयार कर लिख सकते हैं।)

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आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
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