'ज' का अर्थ क्या है? 'J' ka arth | द्विज का अर्थ
द्विज, पंकज, नीरज, जलज, सरोज, आत्मज, वातज, पित्तज, पादज, गतिज आदि शब्दों अंत में 'ज' का प्रयोग होता है। 'ज' अर्थात 'जायते' जिसका अर्थ जन्म लेना।
शब्द – "वर्णों का ऐसा समूह जिससे कोई सार्थक अर्थ निकले शब्द कहलाते हैं।"
हिंदी वर्णमाला में कुछ ऐसे वर्ण भी हैं जो शब्दों का कार्य करते हुए एक अर्थ को प्रदर्शित करते हैं।
उदाहरण– 'व' शब्द का अर्थ 'और' 'तथा' या 'एवं' से है। जैसे– माता व पिता, कलम व स्याही, राजा व रानी। इन शब्दों में हम देखते हैं की 'व' का अर्थ 'और', 'एवं' या 'तथा' से है।
इसी तरह 'ज' वर्ण के भी अर्थ हैं। 'ज' वर्ण जब अर्थ देता है तब वह एक शब्द होता है। प्रत्येक वर्ण जब अर्थ दे तब वे शब्द होते हैं।
'ज' का अर्थ –
'ज' अर्थात 'जायते' जिसका अर्थ जन्म लेना। अतः 'ज' का अर्थ उत्पन्न होना, पैदा होना या उत्पत्ति होना से आशय है।
जब द्विज, पंकज, नीरज, जलज, सरोज, आत्मज, वातज, पित्तज, पादज, गतिज आदि शब्दों अंत में 'ज' का प्रयोग होता है तब इन शब्दों का अर्थ इस प्रकार होता है।
1. द्विज = द्वि+ज – सामान्यतः 'द्विज' शब्द का प्रयोग किसी पंडित, ज्ञानी या ब्राह्मण के लिए किया जाता है। किंतु इस शब्द का शाब्दिक अर्थ ले तो 'द्विज' का आशय दो बार जन्म लेने वाले से होता है। अब यहाँ पर 'द्विज' का आशय दो बार जन्म लेने वाले से है। तो इस तरह दो बार जन्म लेने वाले को 'द्विज' कहते हैं। जब कोई व्यक्ति अपनी माँ के गर्भ से जन्म लेता है उस समय वह पशुवत में होता है और उसका यह पहला जन्म होता है। बाद के काल में वही व्यक्ति ज्ञान अर्जन करके समाज और देश को एक नई दिशा देता है, संस्कार बाँटता है तब उसका दूसरा जन्म होता है या उस व्यक्ति का दूसरा जन्म माना जाता है। इस तरह से किसी भी ज्ञानी पुरुष या पंडित के लिए 'द्विज' शब्द का प्रयोग किया जाता है। प्रायः इस शब्द का प्रयोग ब्राह्मणों के लिए किया जाता है क्योंकि ब्राह्मणों को ज्ञानवान ही माना जाता है। उन्हें वेदों का ज्ञान होता है और वे जनमानस को एक रास्ता दिखाते हैं। इसलिए इनके लिए 'द्विज' शब्द का प्रयोग किया जाता है।
2. पंकज = पंक+ज – पंक अर्थात कीचड़ जो कीचड़ में पैदा हुआ हो या होता हो उसे पंकज कहते हैं। जैसे 'कमल' कीचड़ में पैदा होता है इसीलिए इस शब्द के लिए 'पंकज' का प्रयोग किया जाता है।
3. नीरज = नीर+ज – 'नीर' का अर्थ पानी से है। अतः पानी में पैदा होने वाले या उत्पन्न होने वाले के लिए 'नीरज' का प्रयोग किया जाता है। विशेष तौर से 'कमल' पानी में पैदा होता है इसलिए इसके लिए 'नीरज' शब्द का भी प्रयोग करते हैं।
4. जलज = जल+ज – उपर्युक्त शब्दों के अनुसार 'जल' में पैदा होने वाले या उत्पन्न होने वाले के लिए 'जलज' शब्द का प्रयोग करते हैं 'जलज' शब्द का प्रयोग 'कमल' के लिए किया जाता है क्योंकि 'कमल' जल में पैदा होता है। इसी तरह से 'जल' में 'मोती', 'शंख', 'मछली', 'काई' पैदा होते हैं। इनके लिए भी 'जलज' शब्द का प्रयोग किया जाता है।
5. सरोज = सरो+ज – यहाँ पर 'सरो' से आशय 'सरोवर' अर्थात 'तालाब' से है और तालाब में पैदा होने वाले के लिए 'सरोज' शब्द का प्रयोग किया जाता है। उपरोक्त शब्दानुसार 'कमल' तालाब में पैदा होता है इसलिए 'कमल' शब्द के लिए 'सरोज' शब्द का प्रयोग किया जाता है।
6. आत्मज = आत्म+ज – 'आत्मज' शब्द में 'आत्म' का आशय 'स्वयं' से होता है जबकि 'ज' का आशय जन्म देने वाले से है। अतः यहाँ पर 'आत्मज' से आशय होगा जब हम स्वयं किसी व्यक्ति विशेष से जन्म लें अर्थात 'पिता' हमें जन्म देता है इसलिए वह हमारा स्वयं का 'आत्मज' होता है।
7. वातज = वात+ज – 'वातज' शब्द में 'वात' का आशय 'वायु' से है और 'ज' से आशय जन्म लेने वाले से है। अतः वायु में जो जन्म लेने वाले के लिए 'वातज' का प्रयोग किया जाता है।
8. पित्तज = पित्त + ज – पित्त में उत्पन्न होने वाले के लिए 'पित्तज' शब्द का प्रयोग किया जाता है।
9. पादज = पाद + ज – पैरों में पैदा होने वाले के लिए 'पादज' शब्द का प्रयोग किया जाता है।
10. गतिज = गती + ज – गति से पैदा होने वाले के लिए 'गतिज' शब्द का प्रयोग किया जाता है।
इस तरह से उपरोक्त शब्दों का उदाहरण लेते हुए 'ज' का अर्थ स्पष्ट किया गया है। इसी तरह से भिज्ञ एवं अभिज्ञ में अन्तर को भी जानें। 'ज' के अर्थ का अधिक विवरण पाने के लिए नीचे दिए गए वीडियो पर क्लिक कर देखें।
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